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Chapters
1.2: पद
1.3: दोहे
▶ 1.4: मनुष्यता
1.5: पर्वत प्रदेश में पावस
1.6: मधुर-मधुर मेरे दीपक जल
1.7: तोप
1.8: कर चले हम फ़िदा
1.9: आत्मत्राण
2.1: बड़े भाई साहब
2.2: डायरी का एक पन्ना
2.3: तताँरा-वामीरो कथा
2.4: तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र
2.5: गिरगिट
2.6: अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले
2.7: पतझर में टूटी पत्तियाँ
2.8: कारतूस

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Solutions for Chapter 1.4: मनुष्यता
Below listed, you can find solutions for Chapter 1.4 of CBSE NCERT for Hindi - Sparsh Part 2 Class 10.
NCERT solutions for Hindi - Sparsh Part 2 Class 10 1.4 मनुष्यता प्रश्न-अभ्यास (क) [Page 22]
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
कवि ने कैसी मृत्यु को सुमृत्यु कहा है?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
उदार व्यक्ति की पहचान कैसे हो सकती है?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
कवि ने दधीचि कर्ण, आदि महान व्यक्तियों का उदाहरण देकर मनुष्यता के लिए क्या संदेश दिया है?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
कवि ने किन पंक्तियों में यह व्यक्त किया है कि हमें गर्व-रहित जीवन व्यतीत करना चाहिए?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
'मनुष्य मात्र बंधु है'से आप क्या समझते हैं? स्पष्ट कीजिए।
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
कवि ने सबको एक होकर चलने की प्रेरणा क्यों दी है?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
व्यक्ति को किस प्रकार का जीवन व्यतीत करना चाहिए? इस कविता के आधार पर लिखिए।
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
'मनुष्यता' कविता के माध्यम से कवि क्या संदेश देना चाहता है?
NCERT solutions for Hindi - Sparsh Part 2 Class 10 1.4 मनुष्यता प्रश्न-अभ्यास (ख) [Page 22]
निम्नलिखित प्रश्न का भाव स्पष्ट कीजिए −
सहानुभूति चाहिए, महाविभूति है यही;
वशीकृता सदैव है बनी हुई स्वयं मही।
विरुद्धवाद बुद्ध का दया-प्रवाह में बहा,
विनीत लोकवर्ग क्या न सामने झुका रहा?
निम्नलिखित प्रश्न का भाव स्पष्ट कीजिए −
रहो न भूल के कभी मदांध तुच्छ वित्त में,
सनाथ जान आपको करो न गर्व चित्त में।
अनाथ कौन है यहाँ? त्रिलोकनाथ साथ हैं,
दयालु दीनबंधु के बड़े विशाल हाथ हैं।
निम्नलिखित प्रश्न का भाव स्पष्ट कीजिए −
चलो अभीष्ट मार्ग में सहर्ष खेलते हुए,
विपत्ति, विघ्न जो पड़ें उन्हें ढकेलते हुए।
घटे न हेलमेल हाँ, बढ़े न भिन्नता कभी,
अतर्क एक पंथ के सतर्क पंथ हों सभी।
NCERT solutions for Hindi - Sparsh Part 2 Class 10 1.4 मनुष्यता योग्यता विस्तार [Page 22]
अपने अध्यापक की सहायता से रंतिदेव, दधीचि, कर्ण आदि पौराणिक पात्रों के विषय में जानकारी प्राप्त कीजिए।
‘परोपकार’ विषय पर आधारित दो कविताओं और दो दोहों का संकलन कीजिए। उन्हें कक्षा में सुनाइए।
NCERT solutions for Hindi - Sparsh Part 2 Class 10 1.4 मनुष्यता परियोजना कार्य [Page 23]
अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध’ की कविता ‘कर्मवीर’ तथा अन्य कविताओं को पढ़िए तथा कक्षा में सुनाइए।
भवानी प्रसाद मिश्र की ‘प्राणी वही प्राणी है’ कविता पढ़िए तथा दोनों कविताओं के भावों में व्यक्त हुई समानता को लिखिए।
NCERT solutions for Hindi - Sparsh Part 2 Class 10 1.4 मनुष्यता अतिरिक्त प्रश्न
‘विचार लो कि मर्त्य हो’ कवि ने ऐसा क्यों कहा है? इसे सुमृत्यु कैसे बनाया जा सकता है?
कवि किसके जीने और मरने को एक समान बताता है?
“अखंड आत्मभाव भरने’ के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?
मनुष्य किसी अन्य को अनाथ समझने की भूल कब कर बैठता है?
हमें किसी को अनाथ क्यों नहीं समझना चाहिए?
उशीनर कौन थे? उनके परोपकार का वर्णन कीजिए।
कवि ने महाविभूति किसे कहा है और क्यों?
अपने लिए जीने वाला कभी मरता नहीं’ कवि ने ऐसा क्यों कहा है?
कवि ने सफलता पाने के लिए मनुष्य को किस तरह प्रयास करने के लिए कहा है?
‘रहो न यों कि एक से न काम और का सरे’ के माध्यम से कवि क्या सीख देना चाहता है?
‘मनुष्यता’ कविता में कवि ने मनुष्य के किस कृत्य को अनर्थ कहा है और क्यों ?
‘मनुष्यता’ कविता की वर्तमान में प्रासंगिकता स्पष्ट कीजिए।
‘मनुष्यता’ कविता में वर्णित उशीनर, दधीचि और कर्ण के उन कार्यों का उल्लेख कीजिए जिससे वे मनुष्य को मनुष्यता की राह दिखा गए।
Solutions for 1.4: मनुष्यता

NCERT solutions for Hindi - Sparsh Part 2 Class 10 chapter 1.4 - मनुष्यता
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