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प्रश्न
बच्चों से प्रेम करने वाले महापुरुषों के जीवन के कोई प्रसंग बताइए।
उत्तर
देश के सर्वोच्च सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित डॉ ए. पी. जे. अब्दुल कलाम, भारत के एक प्रख्यात भारतीय वैज्ञानिक होने के साथ-साथ भारत के 11वें एवं पहले गैर राजनीतिज्ञ राष्ट्रपति थे, जिन्हें “मिसाइल मैन” के नाम से भी जाना जाता था। उनका जन्म 15 अक्टूबर 1931 को रामेश्वरम में हुआ था। डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम का जीवन देशवासियों के लिए, खासतौर पर बच्चों और युवाओं के लिए हमेशा प्रेरणा का स्त्रोत रहा है। यह बात उस समय कि है, जब कलाम इसरो के बहुत ही महत्वपूर्ण और लंबे समय से चले आ रहे प्रोजेक्ट पर अन्य 70 वैज्ञानिकों के साथ दिन-रात मेहनत कर रहे थे। मिशन में आ रही तकनकी दिक्कतों से वे मिशन की सफलता को लेकर संशय में थे। लेकिन वे आशावान भी थे। उसी समय कलाम के चेंबर में एक वैज्ञानिक ने आकर उनसे आग्रह किया कि क्या वह आज शाम साढ़े पांच बजे काम खत्म करके घर जा सकता है। उसका कहना था कि उसने अपने बच्चों को आज प्रदर्शनी में ले जाने का वादा किया है। यह सुनकर कलाम ने उसे आज्ञा दे दी। वह वैज्ञानिक खुशी-खुशी फिर काम पर लग गया। उसके बाद वह वैज्ञानिक काम में इतना लीन हो गया की उसे अपने बच्चों से किए वादों का भी ख्याल नहीं रहा। उसे इस बात कि तब सूध हुई जब उसने कई घंटे बाद अपनी घड़ी देखी। जिसमें साढ़े आठ बज रहे थे। यह देख वह जल्दी-जल्दी कलाम के चेंबर में पहुंचा, लेकिन उसे यह देखकर निराशा हुई की डॉ. कलाम वहां नहीं थे। उसे अपने बच्चों से किए वादे न पूरा करने का दुख था। वह उदासमन अपने घर लौट आया। घर लौटने पर उसने अपनी पत्नी से पूछा- बच्चे कहाँ है? तो पत्नी ने उत्तर देते हुए कहा- तुम नहीं जानते? तुम्हारे मैनेजर डॉ. कलाम घर आए थे और बच्चों को अपने साथ प्रदर्शनी दिखाने ले गए। यह सुनकर वह मन ही मन कलाम को धन्यवाद देते हुए हंसने लगा। दरसल, जब डॉ. कलाम ने देखा कि वैज्ञानिक जोर-सोर एवं पूरी तरह संलगन होकर काम में लगे हुए हैं, तो उन्होंने सोचा की इन्हें काम को बीच में नहीं छोड़ना चाहिए। उनका ध्यान नहीं भटकना चाहिए। लेकिन जब किसी ने अपने बच्चों से वादा किया है तो वे जरूर प्रदर्शनी देखने जाएंगे। इसलिए उन्होंने बच्चों को घुमाने का काम स्वयं करने का फैसला किया और उन्हें प्रदर्शनी दिखाने ले गए।
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पर एक दिन की बात, बच्चों ने कुछ ज्यादा ही चिढ़ा दिया, तो ताई अपना गुस्सा काबू नहीं कर पाईं। लाठी लेकर पीछे-पीछे दौड़ पड़ीं। पर अभी कुछ ही आगे गई थीं कि एक गड्ढ़े में उनका पैर पड़ा लाठी दूर जा गिरी और ताई बुरी तरह लड़खड़ाकर जमीन पर आ गिरीं। सिर से खून निकलने लगा। एक पैर भी बुरी तरह मुड़ गया था और ताई हाय-हाय कर रही थीं। उन्होंने खुद उठने की दो-एक बार कोशिश की, पर लाचार थीं। बच्चे दूर से यह देख रहे थे। पर पास आने की उनकी हिम्मत नहीं हुई। आखिर गोलू और भीमा ने किसी तरह आगे आकर उन्हें सहारा दिया और उन्हें घर के अंदर ले गए। |
संजाल पूर्ण कीजिएः
पर एक दिन की बात, बच्चों ने कुछ ज्यादा ही चिढ़ा दिया, तो ताई अपना गुस्सा काबू नहीं कर पाईं। लाठी लेकर पीछे-पीछे दौड़ पड़ीं। पर अभी कुछ ही आगे गई थीं कि एक गड्ढ़े में उनका पैर पड़ा लाठी दूर जा गिरी और ताई बुरी तरह लड़खड़ाकर जमीन पर आ गिरीं। सिर से खून निकलने लगा। एक पैर भी बुरी तरह मुड़ गया था और ताई हाय-हाय कर रही थीं। उन्होंने खुद उठने की दो-एक बार कोशिश की, पर लाचार थीं। बच्चे दूर से यह देख रहे थे। पर पास आने की उनकी हिम्मत नहीं हुई। आखिर गोलू और भीमा ने किसी तरह आगे आकर उन्हें सहारा दिया और उन्हें घर के अंदर ले गए। |
उत्तर लिखिए:
‘बच्चे दूर से यह देख रहे थे।’ इस वाक्य से होने वाला बोध
पर एक दिन की बात, बच्चों ने कुछ ज्यादा ही चिढ़ा दिया, तो ताई अपना गुस्सा काबू नहीं कर पाईं। लाठी लेकर पीछे-पीछे दौड़ पड़ीं। पर अभी कुछ ही आगे गई थीं कि एक गड्ढ़े में उनका पैर पड़ा लाठी दूर जा गिरी और ताई बुरी तरह लड़खड़ाकर जमीन पर आ गिरीं। सिर से खून निकलने लगा। एक पैर भी बुरी तरह मुड़ गया था और ताई हाय-हाय कर रही थीं। उन्होंने खुद उठने की दो-एक बार कोशिश की, पर लाचार थीं। बच्चे दूर से यह देख रहे थे। पर पास आने की उनकी हिम्मत नहीं हुई। आखिर गोलू और भीमा ने किसी तरह आगे आकर उन्हें सहारा दिया और उन्हें घर के अंदर ले गए। |
‘गुस्से पर काबू रखना’ इसपर अपने विचार लिखिए।
संजाल पूर्ण कीजिए:
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ताई का वात्सल्य प्रकट करने वाले वाक्य ढॅूंढ़कर लिखिए।
पर एक दिन की बात, बच्चों ने कुछ ज्यादा ही चिढ़ा दिया, तो ताई अपना गुस्सा काबू नहीं कर पाईं। लाठी लेकर पीछे-पीछे दौड़ पड़ीं। पर अभी कुछ ही आगे गई थीं कि एक गड्ढ़े में उनका पैर पड़ा लाठी दूर जा गिरी और ताई बुरी तरह लड़खड़ाकर जमीन पर आ गिरीं। सिर से खून निकलने लगा। एक पैर भी बुरी तरह मुड़ गया था और ताई हाय-हाय कर रही थीं। उन्होंने खुद उठने की दो-एक बार कोशिश की, पर लाचार थीं। बच्चे दूर से यह देख रहे थे। पर पास आने की उनकी हिम्मत नहीं हुई। आखिर गोलू और भीमा ने किसी तरह आगे आकर उन्हें सहारा दिया और उन्हें घर के अंदर ले गए। |
परिच्छेद में आए शब्द युग्म: