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महाराष्ट्र स्टेट बोर्डएसएससी (हिंदी माध्यम) ९ वीं कक्षा

‘प्यार लुटाने से ही प्यार मिलता है’ इसपर अपने विचार लिखिए। - Hindi [हिंदी]

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प्रश्न

‘प्यार लुटाने से ही प्यार मिलता है’ इसपर अपने विचार लिखिए।

संक्षेप में उत्तर

उत्तर

एक दिन की बात, बच्चों ने कुछ ज्‍यादा ही चिढ़ा दिया, तो ताई अपना गुस्सा काबू नहीं कर पाईं। लाठी लेकर पीछे-पीछे दौड़ पड़ीं। पर अभी कुछ ही आगे गई थीं कि एक गड्ढ़े में उनका पैर पड़ा लाठी दूर जा गिरी और ताई बुरी तरह लड़खड़ाकर जमीन पर आ गिरीं। सिर से खून निकलने लगा। एक पैर भी बुरी तरह मुड़ गया था और ताई हाय-हाय कर रही थीं। उन्होंने खुद उठने की एक-दो बार कोशिश की, पर लाचार थीं। बच्चे दूर से यह देख रहे थे, पर पास आने की उनकी हिम्‍मत नहीं हुई। आखिर गोलू और भीमा ने किसी तरह आगे आकर उन्हें सहारा दिया और उन्हें घर के अंदर ले गए। नीना ने सुना तो दौड़ी-दौड़ी घर गई, नानी को बुला लाई। नानी और नीना दोनों बड़े प्यार से सींकवाली ताई को अपने घर ले गए। पुरे महीने तक नीना अपनी नानी की मदद से सींकवाली ताई की खूब सेवा करती रही। सींकवाली ताई के मुख से नीना के लिए लगातार आशीर्वाद निकलते रहते। उनकी कड़वाहट न जाने कहाँ गायब हो गई थी। यहाँ तक कि जिन बच्चों के कारण वे गिरीं, उनके लिए भी कोई कड़वा शब्‍द उनके मुँह से नहीं निकला। बच्चे पहले तो दूर-दूर, डरे-डरे से रहे, पर फिर वे भी नीना के साथ मिलकर ताई की सेवा में जुट गए। महीने, डेढ़ महीने में ही पूरी तरह ठीक हो गईं। ताई को नीना और बच्चे ही उन्हें घर छोड़कर आए। अब तो बच्चे हर समय उन्हें घेरे रहते। बचपन में सुनी हजारों कहानियाँ सींकवाली ताई को याद थीं और उनका खजाना कभी खत्‍म होने में ही नहीं आता था। उन्हें सुन-सुनकर बच्चे हँसते, संग-संग ताई भी। अब सींकवाली ताई कभी-कभी कहा करतीं, ‘‘अब मैं समझ पाई हूँ कि प्यार लुटाने से ही प्यार मिलता है।”

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सींकवाली
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अध्याय 1.02: सींकवाली - स्वाध्याय [पृष्ठ ७]

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बालभारती Hindi - Kumarbharati 9 Standard Maharashtra State Board
अध्याय 1.02 सींकवाली
स्वाध्याय | Q २ | पृष्ठ ७

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पर एक दिन की बात, बच्चों ने कुछ ज्‍यादा ही चिढ़ा दिया, तो ताई अपना गुस्सा काबू नहीं कर पाईं। लाठी लेकर पीछे-पीछे दौड़ पड़ीं। पर अभी कुछ ही आगे गई थीं कि एक गड्ढ़े में उनका पैर पड़ा लाठी दूर जा गिरी और ताई बुरी तरह लड़खड़ाकर जमीन पर आ गिरीं। सिर से खून निकलने लगा। एक पैर भी बुरी तरह मुड़ गया था और ताई हाय-हाय कर रही थीं। उन्होंने खुद उठने की दो-एक बार कोशिश की, पर लाचार थीं। बच्चे दूर से यह देख रहे थे। पर पास आने की उनकी हिम्‍मत नहीं हुई। आखिर गोलू और भीमा ने किसी तरह आगे आकर उन्हें सहारा दिया और उन्हें घर के अंदर ले गए।

उत्तर लिखिए:

‘बच्चे दूर से यह देख रहे थे।’ इस वाक्‍य से होने वाला बोध


पर एक दिन की बात, बच्चों ने कुछ ज्‍यादा ही चिढ़ा दिया, तो ताई अपना गुस्सा काबू नहीं कर पाईं। लाठी लेकर पीछे-पीछे दौड़ पड़ीं। पर अभी कुछ ही आगे गई थीं कि एक गड्ढ़े में उनका पैर पड़ा लाठी दूर जा गिरी और ताई बुरी तरह लड़खड़ाकर जमीन पर आ गिरीं। सिर से खून निकलने लगा। एक पैर भी बुरी तरह मुड़ गया था और ताई हाय-हाय कर रही थीं। उन्होंने खुद उठने की दो-एक बार कोशिश की, पर लाचार थीं। बच्चे दूर से यह देख रहे थे। पर पास आने की उनकी हिम्‍मत नहीं हुई। आखिर गोलू और भीमा ने किसी तरह आगे आकर उन्हें सहारा दिया और उन्हें घर के अंदर ले गए।

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पर एक दिन की बात, बच्चों ने कुछ ज्‍यादा ही चिढ़ा दिया, तो ताई अपना गुस्सा काबू नहीं कर पाईं। लाठी लेकर पीछे-पीछे दौड़ पड़ीं। पर अभी कुछ ही आगे गई थीं कि एक गड्ढ़े में उनका पैर पड़ा लाठी दूर जा गिरी और ताई बुरी तरह लड़खड़ाकर जमीन पर आ गिरीं। सिर से खून निकलने लगा। एक पैर भी बुरी तरह मुड़ गया था और ताई हाय-हाय कर रही थीं। उन्होंने खुद उठने की दो-एक बार कोशिश की, पर लाचार थीं। बच्चे दूर से यह देख रहे थे। पर पास आने की उनकी हिम्‍मत नहीं हुई। आखिर गोलू और भीमा ने किसी तरह आगे आकर उन्हें सहारा दिया और उन्हें घर के अंदर ले गए।

परिच्छेद में आए शब्‍द युग्‍म:


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