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प्रश्न
‘बढ़ती आबादी, कटते वन, प्रदूषण से प्रभावित होता जन जीवन’ पर अपने विचार लिखिए।
उत्तर
पर्यावरण और मानव का गहरा नाता है। इस नाते की डोर को सबसे मजबूती से जिसने बाँध रखा है, वे हैं वृक्ष एक समय था जब धरती का बहुत बड़ा भाग घने जंगलों से ढका हुआ था। आज के आधुनिकीकरण के युग में भी अशिक्षा, गरीबी, अंधविश्वास तथा बढ़ती स्वास्थ्य चिकित्सा सुविधाओं के कारण जनसंख्या निरंतर बढ़ रही है। बढ़ती आबादी के कारण रोज नई समस्याएँ निर्माण हो रही हैं। खान-पान के साथ-साथ रहने का संकट निर्माण होता जा रहा है। खादंयान्न की कमी के कारण भुखमरी जैसी समस्याओं से पूरे विश्व को जूझना पड़ रहा है। मानव का जन्म प्रकृति की गोद में हुआ और उसी में वह अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति करते हुए बड़ा हुआ। परंतु समय के साथ बढ़ती जनसंख्या, शहरीकरण, औद्योगिक विकास, कृषि विस्तार के कारण वनों के वृक्षों को बहुत तेजी से काटा गया। रहने की समस्या को दूर करने के लिए मनुष्य समुंदर को पाटने में जुटा है और जंगलों को काटकर नए घरों का निर्माण करता जा रहा है। मनुष्य द्वारा उठाए गए इस कदम का दुष्परिणाम भी प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से उसे ही भोगना पड़ रहा है।
हजारों -लाखों वर्षों से संचित वन रूपी संपत्ति को हमने समाप्त कर दिया हे। जैसे-जैसे वनों को काटकर उद्योग-धंधे लगाए जा रहे हैं, वैसे-वैसे वायुमंडल में कार्बन-डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड जेसी जहरीली गेसें बढ़ती जा रही हैं। ऑक्सीजन की कमी होने लगी है। वन ही ऑक्सीजन का एकमात्र स्रोत हैं। कटते वन समस्त प्राणी जगत के लिए हानिकारक हैं। प्रकृति के बिगड़ते संतुलन के कारण आए दिन अकाल, भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट, असमय बरसात, बाढ़ जैसे संकट उठ खड़े होते हैं। इन सबका दुष्प्रभाव मानव पर ही पड़ता है।
अत: बढ़ती आबादी के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। अतः हमें वनों के महत्त्व को समझना चाहिए और पृथ्वी के जनजीवन और पर्यावरण को बचाने के लिए अधिक-से-अधिक वृक्ष लगाने चाहिए।
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संबंधित प्रश्न
निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
मैंने देखा, हरसिंगार नये पत्तों और टहनियों से लद गया है। जोड़े में खंखड़-सा हो जाता है और कभी-कभी डर लगता है कि यह सूख तो नहीं रहा है, लेकिन वसंत आते ही इसके भीतर सोई ऊर्जा जागने लगती है, प्राणरस छलकने लगता है और क्रमश: नई टहनियों तथा नये पत्तों के सौंदर्य से लद जाता है। मैं उसे देख रहा हूँ और लगता है, अब इसमें फूल आया, तब इसमें फूल आया। हाँ, यह हरसिंगार बहुत मस्त है। आषाढ़ में हलकी-हलकी हँसी उसमें फूटने लगती है, फिर शरद में तो कहना ही क्या! तारों भरा आसमान बन जाता है। रात भर जगमग-जंगमंग करता रहता है और सुबह को अनंत फूलों के रूपमें धरती पर बिछ जाता है। रात भर उसकी महक घर में टहलती रहती है। |
(1) कृति पूर्ण कौजिए: (2)
हरसिंगार में होने वाले बदलाव
- वसंत ऋतु में ______
- वर्षा ऋतु में ______
(2) (i) वचन परिवर्तन करके वाक्य फिर से लिखिए: (1)
ऊर्जा जागने लगती है।
(ii) निम्नलिखित शब्दों के लिए गद्यांश में आए विलोम शब्द ढूँढ़कर लिखिए: (1)
- पुरानी × ______
- दिन × ______
(3) “प्रकृति की रक्षा करना हमारा कर्तव्य' विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए। (2)
निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए-
'चिड़ियाँ चहचहा उठीं। फिर समूह में फुर्र से उड़ी और आकाश में पंखों व स्वरों की एक लय बन गई, फिर वे लौट आईं। हाँ उनके आश्रय की तरह यह हरसिंगार का पेड़ कितना खुश हो रहा है। जैसे कह रहा हो, “आओ चिड़ियो, मेरी डाल-डाल पर फुदको और गाओ। आओ चिड़ियो अपने मीठे-मीठे स्वरों से मुझे नहलाओ।" मैंने देखा, हरसिंगार नये पत्तों और टहनियों से लद गया हैं। |
(1) कृति पूर्ण कीजिए- (2)
(i)
(2) (i) प्रत्यय लगाकार वाक्य फिर से लिखिए: (1)
पेड़ कितना खुश हो रहा है।
(ii) निम्नलिखित शब्दों के लिए गद्यांश में आए विलोम शब्द ढूँढ़कर लिखिए: (1)
- अप्रसन्न - ______
- कड़वे - ______
(3) चिड़ियों की चहचहाट पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए। (2)
फूलों से बनने वाली औषधियाें की जानकारी अंतरजाल पर पढ़िए।
‘वनभोज’ महोत्सव का आयोजन कब, क्यों और कहाँ किया जाता है, इसके बारे में बड़ों से सुनिए तथा लिखिए।
‘प्रकृति हर पल नया रूप धारण करती है’ इससे संबंधित अपने आस-पास के उदाहरणों को देकर अपने मित्रों से संवाद कीजिए।
संजाल पूर्ण कीजिए:
पाठ में आई वनस्पतियों का वर्गीकरण कीजिए:
अ.क्र | लताएँ | पौधे | वृक्ष |
हरसिंगार में ॠतुओं के अनुसार होने वाले बदलाव
वसंत | ______ |
शरद | ______ |
कृति पूर्ण कीजिए:
क्रमानुसार ॠतुओं के नाम लिखिए:
१ | वसंत |
२ | ______ |
३ | ______ |
४ | ______ |
५ | ______ |
६ | ______ |