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प्रश्न
फूलों से बनने वाली औषधियाें की जानकारी अंतरजाल पर पढ़िए।
उत्तर
- लैवेंडर (Lavender): लैवेंडर के फूलों से निकाले गए तेल का इस्तेमाल स्ट्रेस, चिंता, और अच्छी नींद प्राप्त करने के लिए किया जा सकता है। इसे अरोमाथेरेपी में भी उपयोग किया जाता है।
- गुलाब: गुलाब का फूल पूरे साल देखने को मिलता है, परंतु ठंड के मौसम में गुलाब अधिक खिलते हैं। घाव भरने के लिए गुलाब का तेल फायदेमंद है। इसकी पंखुड़ियों से रस, तेल, गुलाबजल आदि बनाए जाते हैं। सिरदर्द, कब्ज, पायरिया आदि बीमारियों को दूर करने के लिए गुलाब का रस पीना चाहिए। बालों, त्वचा तथा आँखों के लिए गुलाबजल अत्यंत लाभकारी होता है।गुलाब के फूलों से बना गुलाब जल त्वचा की देखभाल के लिए उपयोगी है। इसमें अंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं जो त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं।
- साफ़ेद अर्क (White Willow Bark): साफ़ेद अर्क फूलों से निकाला जाने वाला सलिकिन से बनाया जाता है और इसे पेन किलर और एंटी-इन्फ्लैमेटरी के रूप में उपयोग किया जा सकता है।
- सदाबहार: सदाबहार के फूल हर मौसम में खिलते हैं। इसके पत्तों के रस को घाव पर लगाने से घाव जल्दी ठीक होता है तथा खुजली, लाल निशान, कील मुहाँसों आदि में त्वचा पर लगाने से आराम मिलता है। डेंगू, बवासीर तथा कैंसर जैसी बीमारियों के लिए इसकी पत्तियाँ अत्यंत उपयोगी मानी गई हैं।
- कमल: कमल के बीज पीसकर खाने से उल्टी बंद हो जाती है। कमल की जड़ का चूर्ण एक माह तक नियमित खाने से अनचाहे वीर्यपात से निजात मिलती है। इसकी पंखुड़ियों और पत्तों का लेप चेहरे पर लगाने से चेहरा सुंदर व कोमल बनता है। यह लेप चर्मतेग को दूर करने के लिए लाभकारी हैं। इसकी जड़ को पानी में घिसकर लेप बनाया जाता है।
- गेंदा: इसकी पंखुड़ियों को पीसकर रस बनाया जाता है। दाद और छाजन पर इसका रस लगाने से बीमारी ठीक हो जाती है।
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संबंधित प्रश्न
निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
मैंने देखा, हरसिंगार नये पत्तों और टहनियों से लद गया है। जोड़े में खंखड़-सा हो जाता है और कभी-कभी डर लगता है कि यह सूख तो नहीं रहा है, लेकिन वसंत आते ही इसके भीतर सोई ऊर्जा जागने लगती है, प्राणरस छलकने लगता है और क्रमश: नई टहनियों तथा नये पत्तों के सौंदर्य से लद जाता है। मैं उसे देख रहा हूँ और लगता है, अब इसमें फूल आया, तब इसमें फूल आया। हाँ, यह हरसिंगार बहुत मस्त है। आषाढ़ में हलकी-हलकी हँसी उसमें फूटने लगती है, फिर शरद में तो कहना ही क्या! तारों भरा आसमान बन जाता है। रात भर जगमग-जंगमंग करता रहता है और सुबह को अनंत फूलों के रूपमें धरती पर बिछ जाता है। रात भर उसकी महक घर में टहलती रहती है। |
(1) कृति पूर्ण कौजिए: (2)
हरसिंगार में होने वाले बदलाव
- वसंत ऋतु में ______
- वर्षा ऋतु में ______
(2) (i) वचन परिवर्तन करके वाक्य फिर से लिखिए: (1)
ऊर्जा जागने लगती है।
(ii) निम्नलिखित शब्दों के लिए गद्यांश में आए विलोम शब्द ढूँढ़कर लिखिए: (1)
- पुरानी × ______
- दिन × ______
(3) “प्रकृति की रक्षा करना हमारा कर्तव्य' विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए। (2)
निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए-
'चिड़ियाँ चहचहा उठीं। फिर समूह में फुर्र से उड़ी और आकाश में पंखों व स्वरों की एक लय बन गई, फिर वे लौट आईं। हाँ उनके आश्रय की तरह यह हरसिंगार का पेड़ कितना खुश हो रहा है। जैसे कह रहा हो, “आओ चिड़ियो, मेरी डाल-डाल पर फुदको और गाओ। आओ चिड़ियो अपने मीठे-मीठे स्वरों से मुझे नहलाओ।" मैंने देखा, हरसिंगार नये पत्तों और टहनियों से लद गया हैं। |
(1) कृति पूर्ण कीजिए- (2)
(i)
(2) (i) प्रत्यय लगाकार वाक्य फिर से लिखिए: (1)
पेड़ कितना खुश हो रहा है।
(ii) निम्नलिखित शब्दों के लिए गद्यांश में आए विलोम शब्द ढूँढ़कर लिखिए: (1)
- अप्रसन्न - ______
- कड़वे - ______
(3) चिड़ियों की चहचहाट पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए। (2)
‘बढ़ती आबादी, कटते वन, प्रदूषण से प्रभावित होता जन जीवन’ पर अपने विचार लिखिए।
‘वनभोज’ महोत्सव का आयोजन कब, क्यों और कहाँ किया जाता है, इसके बारे में बड़ों से सुनिए तथा लिखिए।
‘प्रकृति हर पल नया रूप धारण करती है’ इससे संबंधित अपने आस-पास के उदाहरणों को देकर अपने मित्रों से संवाद कीजिए।
संजाल पूर्ण कीजिए:
पाठ में आई वनस्पतियों का वर्गीकरण कीजिए:
अ.क्र | लताएँ | पौधे | वृक्ष |
हरसिंगार में ॠतुओं के अनुसार होने वाले बदलाव
वसंत | ______ |
शरद | ______ |
कृति पूर्ण कीजिए:
क्रमानुसार ॠतुओं के नाम लिखिए:
१ | वसंत |
२ | ______ |
३ | ______ |
४ | ______ |
५ | ______ |
६ | ______ |