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प्रश्न
‘प्रकृति हर पल नया रूप धारण करती है’ इससे संबंधित अपने आस-पास के उदाहरणों को देकर अपने मित्रों से संवाद कीजिए।
उत्तर
ये घटक लगातार नए रूप धारण करते हैं। प्रकृति की नदियाँ, झीलें और समुद्र अपनी विशेष सुंदरता प्रदर्शित करते हैं जो उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करती है। प्रकृति विभिन्न ऋतुओं में बदलती है जैसे वसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, और हेमंत, जिससे नई और आदर्श स्थितियाँ सामने आती हैं और प्राकृतिक सौंदर्य को बढ़ाती हैं। सुबह के समय समुद्र चमकीला नीला दिखाई देता है जो सूर्य प्रकाश के कारण होता है, लेकिन दोपहर में इसका रंग बदल जाता है। आकाश भी दिन भर अपना रंग बदलता रहता है - सूर्योदय के समय पीला गुलाबी, दिन के समय गहरा नीला, सूर्यास्त के समय चमकदार और रात में बैंगनी। पौधे और फूल भी हमें प्रतिदिन अपने नए और आकर्षक रूप दिखाते हैं।
यह हमें दर्शाता है कि जीवन में खुशी के क्षण हमेशा मौजूद होते हैं। विभिन्न मौसमों के साथ, पेड़ों और पौधों पर मौसमी फूल खिलते हैं। उदाहरण के तौर पर, सदाबहार और सहिजन के फूल बारहमासी होते हैं। शरद ऋतु में, अमरूद के पेड़ फलों से भरे होते हैं, जबकि ग्रीष्म ऋतु में, आम के पेड़ भारी आमों से लदे होते हैं। वन्यजीवों के विभिन्न नए रूप हमें प्रकृति की संरचना और जीवन की विविधता को महसूस कराते हैं। इनके नए जीवन के दृश्य को देखना वाकई में एक अनोखा अनुभव होता है।
प्रकृति में बदलाव लाने की अद्भुत क्षमताएँ होती हैं, और ये हमारे स्वभाव को भी प्रभावित करती हैं। जब कोई बीमार या अस्वस्थ व्यक्ति प्रकृति के सुंदर और शांत वातावरण में समय बिताता है, तो वह खुद को स्वस्थ और तरोताजा महसूस करता है। इसलिए हमें प्रकृति की सुंदरता को प्रोत्साहित करना चाहिए और उसे किसी भी हानि से बचाना चाहिए।
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संबंधित प्रश्न
निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
मैंने देखा, हरसिंगार नये पत्तों और टहनियों से लद गया है। जोड़े में खंखड़-सा हो जाता है और कभी-कभी डर लगता है कि यह सूख तो नहीं रहा है, लेकिन वसंत आते ही इसके भीतर सोई ऊर्जा जागने लगती है, प्राणरस छलकने लगता है और क्रमश: नई टहनियों तथा नये पत्तों के सौंदर्य से लद जाता है। मैं उसे देख रहा हूँ और लगता है, अब इसमें फूल आया, तब इसमें फूल आया। हाँ, यह हरसिंगार बहुत मस्त है। आषाढ़ में हलकी-हलकी हँसी उसमें फूटने लगती है, फिर शरद में तो कहना ही क्या! तारों भरा आसमान बन जाता है। रात भर जगमग-जंगमंग करता रहता है और सुबह को अनंत फूलों के रूपमें धरती पर बिछ जाता है। रात भर उसकी महक घर में टहलती रहती है। |
(1) कृति पूर्ण कौजिए: (2)
हरसिंगार में होने वाले बदलाव
- वसंत ऋतु में ______
- वर्षा ऋतु में ______
(2) (i) वचन परिवर्तन करके वाक्य फिर से लिखिए: (1)
ऊर्जा जागने लगती है।
(ii) निम्नलिखित शब्दों के लिए गद्यांश में आए विलोम शब्द ढूँढ़कर लिखिए: (1)
- पुरानी × ______
- दिन × ______
(3) “प्रकृति की रक्षा करना हमारा कर्तव्य' विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए। (2)
निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए-
'चिड़ियाँ चहचहा उठीं। फिर समूह में फुर्र से उड़ी और आकाश में पंखों व स्वरों की एक लय बन गई, फिर वे लौट आईं। हाँ उनके आश्रय की तरह यह हरसिंगार का पेड़ कितना खुश हो रहा है। जैसे कह रहा हो, “आओ चिड़ियो, मेरी डाल-डाल पर फुदको और गाओ। आओ चिड़ियो अपने मीठे-मीठे स्वरों से मुझे नहलाओ।" मैंने देखा, हरसिंगार नये पत्तों और टहनियों से लद गया हैं। |
(1) कृति पूर्ण कीजिए- (2)
(i)
(2) (i) प्रत्यय लगाकार वाक्य फिर से लिखिए: (1)
पेड़ कितना खुश हो रहा है।
(ii) निम्नलिखित शब्दों के लिए गद्यांश में आए विलोम शब्द ढूँढ़कर लिखिए: (1)
- अप्रसन्न - ______
- कड़वे - ______
(3) चिड़ियों की चहचहाट पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए। (2)
फूलों से बनने वाली औषधियाें की जानकारी अंतरजाल पर पढ़िए।
‘बढ़ती आबादी, कटते वन, प्रदूषण से प्रभावित होता जन जीवन’ पर अपने विचार लिखिए।
‘वनभोज’ महोत्सव का आयोजन कब, क्यों और कहाँ किया जाता है, इसके बारे में बड़ों से सुनिए तथा लिखिए।
संजाल पूर्ण कीजिए:
पाठ में आई वनस्पतियों का वर्गीकरण कीजिए:
अ.क्र | लताएँ | पौधे | वृक्ष |
हरसिंगार में ॠतुओं के अनुसार होने वाले बदलाव
वसंत | ______ |
शरद | ______ |
कृति पूर्ण कीजिए:
क्रमानुसार ॠतुओं के नाम लिखिए:
१ | वसंत |
२ | ______ |
३ | ______ |
४ | ______ |
५ | ______ |
६ | ______ |