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प्रश्न
दबाव का सामना करने के विभिन्न उपायों की गणना कीजिए।
उत्तर
सामना करना दबाव के प्रति एक गत्यात्मक स्थिति विशिष्ट प्रतिक्रिया है यह दबाव पूर्ण स्थितियो या घटनाओ के प्रति कुछ निश्चित मूर्त अनुक्रियाओं का समुच्चय होता है जिसका उद्देश्य समस्या का सधारण करना तथा दबाव को काम करना होता है जैसे यदि हम किसी यातायात जाम में फंसे होते है तो हमें क्रोध आ रहा होता है क्योकि हम विश्वास करते है की यातायात को श्रीघ्रता से चलते रहना चाहिए दबाव का प्रबंधन करने के लिए हमारे लिए यह आवशयक है की हम अपने सोचने के तरीके का पुनः मूल्यांकन करे तथा दबाव का सामना करने की युक्तियों या कौशलों को सीखे व्यक्ति दबावपूर्ण स्थितियों का सामना करने का युक्तियों के उपयोग में व्यक्तिगत भिन्नताएं प्रदशित करते है जिनमे लम्बे समय तक संगीति पाई जाती है इनके अंतर्गत प्रकट तथा अप्रकट दो प्रकार की क्रियाओ या कौशल निम्नलिखित है -
- कृत्य- अभिविन्यस्त युक्ति - दबावपूर्ण स्थिति के संबंध में सूचनाएं एकत्रित करना, उनके प्रति क्या - क्या वैकल्पिक क्रियाये हो सकती है तथा उनके संभावित परिणाम क्या हो सकते है यह सब इसके अंतर्गत आता है
- आवेग - अभिविन्यस्त युक्ति - इसके अंतर्गत मन के आशा बनाये रखने के प्रयास तथा अपने संवेगो पर नियंत्रण सम्मिलित हो सकते कुण्ठ तथा क्रोध की भावनाओ को अभिव्यक्ति करना या फिर यह निर्णय करना की परिस्थिति को बदलने के लिए कुछ भी नहीं किया जा सकता है भी इसके अंतर्गत सम्मिलित हो सकता है
- परिहार - अभिविन्यस्त युक्ति - इसके अंतर्गत स्थिति की गंभीरता को नकारना या कम समझना सम्मिलित होते हैं; इसमें दबावपूर्ण विचरों का सचेतन दमन तथा उनके स्थान पर आत्म - रक्षित विचारों का सचेतन दमन तथा उनके स्थान पर आत्म - रक्षित विचारों का प्रतिस्थान भी सम्मिलित होता है। लेजारस तथा फोकमैन ने दबाव का सामना करने का कल्पना - निर्धारण एक गत्यात्मक प्रक्रिया के रूप में किया है, की किसी व्यक्तिगत विशेषक के रूप में। उनके अनुसार, सामना करने की अनुक्रियाएँ दो प्रकार की होती हैं - समस्या - केंद्रित तथा संवेग - केंद्रित।
- समस्या केंद्रित युक्तिय - समस्या - केंद्रित युक्तियाँ समस्या पर ही हमला करती हैं, ऐसा थे उन व्यवहारों द्वारा करती हैं जो सूचनाएँ एकत्रित करने, घटनाओं को परिवर्तित करने तथा विश्वास और प्रतिबद्धता परिवर्तिति करने के लिए होते हैं। वे व्यक्ति की जागरूकता में वृद्धि करती हैं, ज्ञान के स्तर को बढ़ती हैं तथा दबाव का सामना करने के संज्ञानात्मक एवं व्यवहारात्मक विकल्पों में वृद्धि करती हैं। घटना से उत्पन्न खतरे की अनुभूति को भी घटाने का कार्य वे करती हैं। उदाहरण के लिए, "मैंने कार्य करने के लिए एक योजना का निर्माण किया तथा उसका क्रियान्वयन किया।
- संवेग - केंद्रित युक्तियों - ये युक्तियाँ प्रमुखतया मनोवैज्ञानिक परिवर्तन लाने हेतु उपयोग की जाती हैं जिससे घटना में परिवर्तन लाने का अल्पतम प्रयास करते हुए उसके कारण उतपन्न होने वाले संवेगात्मक विघटन के प्रभावों को सिमित किया जा सके। उदाहरण के लिए, "मैंने कुछ कार्य इसलिए किये की मेरे भीतर से वह निकल जाये।" यद्यपि जब व्यक्ति के समक्ष दबावपूर्ण स्थिति उत्पन्न होती है तो समस्या - केंद्रित तथा संवेग - केंद्रित दोनों ही सामना करने की युक्तियों का उपयोग आवश्यक होता है। मगर यह साबित हो चूका है की व्यक्ति प्रथम प्रकार की युक्तियों का अपेक्षाकृत अधिक बार उपयोग करते हैं।
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