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फर्म के ऋण और साझेदारों के व्यक्तिगत ऋणों के मध्य अंतर समझाएँ। - Accountancy (लेखाशास्त्र)

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प्रश्न

फर्म के ऋण और साझेदारों के व्यक्तिगत ऋणों के मध्य अंतर समझाएँ।

संक्षेप में उत्तर

उत्तर

जब साझेदारों के व्यक्तिगत ऋण तथा फर्म के ऋण साथ-साथ होते हैं वहाँ अधिनियम की धारा 49 के निम्न नियम लागू होंगे:

(अ) फर्म की परिसंपत्तियों का प्रयोग सर्वप्रथम फर्म के ऋणों के भुगतान के लिए किया जाएगा तथा आधिक्य राशि, यदि कोई हो तो, साझेदारों में उनके दावों के अनुसार विभाजित होगी जिसका उपयोग अनेक निजी दायित्वों के भुगतान के लिए किया जाएगा।

(ब) साझेदार की निजी परिसंपत्तियों का उपयोग सर्वप्रथम उसके निजी ऋणों के भुगतान के लिए किया जाएगा तथा शेष राशि यदि कोई है तो उसका उपयोग फर्म के ऋणों के भुगतान के लिए उस स्थिति में होगा यदि फर्म के दायित्व फर्म की परिसंपत्तियों से अधिक है।

यह ध्यान रहे कि साझेदारों की निजी परिसंपत्तियों में उसकी पत्नी और बच्चों की निजी परिसंपत्तियों को शामिल नहीं किया जाएगा। अतः यदि फर्म की परिसंपत्तियाँ फर्म के दायित्वों का भुगतान करने के लिए पर्याप्त नहीं है तो साझेदारों को अपनी निवल निजी परिसंपत्तियों (निजी परिसंपत्तियों में से निजी दायित्वों को घटाकर) में अभिदान किया जाएगा।

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फर्म का विघटन
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अध्याय 5: साझेदारी फर्म का विघटन - अभ्यास के लिए प्रश्न [पृष्ठ २६१]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Accountancy - Not-for-Profit Organisation and Partnership Accounts [Hindi] Class 12
अध्याय 5 साझेदारी फर्म का विघटन
अभ्यास के लिए प्रश्न | Q 4. | पृष्ठ २६१
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