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प्रश्न
साझेदारी फर्म के विघटन की प्रक्रिया समझाएँ?
उत्तर
साझेदारी फर्म का विघटन न्यायालय के आदेश से या न्यायालय के दखल के बिना या इस खंड में बाद में वर्णित अन्य तरीकों से हो सकता है। उल्लेखनीय है कि फर्म का विघटन होने पर साझेदारी का विघटन अवश्य हो जाएगा। हालांकि साझेदारी का विघटन फर्म के विघटन को नहीं दर्शाता है।
फर्म का विघटन निम्न में से किसी भी प्रकार हो सकता है:
(1) समझौते द्वारा विघटन - फर्म का विघटन निम्न परिस्थितियों में हो सकता है:
(अ) सभी साझेदारों की सहमति द्वारा;
(ब) साझेदारों के मध्य अनुबंध अनुसार।
(2) अनिवार्य विघटन - फर्म का अनिवार्य विघटन निम्न परिस्थितियों में होता है :
(अ) जब कोई एक साझेदार या सभी साझेदार दिवालिया हो जाएँ, या किसी अनुबंध को करने में अक्षम हो जाएँ;
(ब) जब फर्म का व्यवसाय गैर-कानूनी हो जाए; अथवा
(स) जब कोई ऐसी स्थिति पैदा हो जाए कि साझेदारी फर्म का व्यवसाय गैर-कानूनी हो जाए, उदारणार्थ जब एक साझेदार ऐसे देश का नागरिक हो जिसका भारत के साथ युद्ध घोषित हो जाए।
(3) अनिश्चितता की स्थिति में - साझेदारों के बीच अनुबंध की स्थिति में फर्म का विघटन:
(अ) यदि एक निर्धारित अवधि के लिए गठित है तो उस अवधि के समापन पर;
(ब) यदि एक या अधिक उपक्रम के लिए गठित है तो उसके पूरा होने पर;
(स) साझेदार की मृत्यु पर; अथवा
(द) साझेदार के दिवालिया घोषित होने पर होता है।
(4) सुचना द्वारा विघटन - स्वैच्छिक साझेदारी की स्थिति में यदि एक साझेदार अन्य साझेदारों को लिखित सूचना देकर साझेदारी फर्म के विघटन की इच्छा व्यक्त करता है।
(5) न्यायालय द्वारा विघटन - एक साझेदार की याचिका पर, निम्न स्थितियों में न्यायालय फर्म के विघटन का आदेश दे सकता है;
(अ) जब कोई साझेदार मानसिक संतुलन खो दे;
(ब) जब कोई साझेदार स्थायी रूप से साझेदार के कर्तव्यों का पालन करने में अक्षम हो;
(स) जब कोई साझेदार क्रुप्रबन्ध का दोषी हो जिससे कि फर्म के व्यापर पर विपरीत प्रभाव पड़ने की आशंका हो;
(द) जब कोई साझेदार जानबूझ कर बार -बार साझेदारी अनुबंध का उल्लंघन करता है;
(इ) जब कोई साझेदार फर्म में अपना संपूर्ण हित किसी तीसरे पक्ष को हस्तांतरित कर दे;
(फ) जब फर्म को व्यवसाय चलाने से हानि के अतिरिक्त कुछ न हो; अथवा
(ज) जब न्यायालय फर्म के विघटन को ठीक व न्यायसंगत समझे।
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