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प्रश्न
गांधी मैदान पहुँचकर लेखक ने कैसा दृश्य देखा? इस मैदान से जुड़ी कौन-कौन-सी यादें भूलती जा रही थीं?
उत्तर
गांधी मैदान पहुँचकर लेखक ने देखा कि इस मैदान की रेलिंग के सहारे इतने लोग खड़े थे कि उनकी संख्या दशहरा के दिन रामलीला के ‘राम’ के रथ की प्रतीक्षा करते लोगों से अधिक ही रही होगी। इस मैदान से जुड़ी आनंद-उत्सव, सभासम्मेलन और खेलकूद की सारी यादें लेखक को भूलती जा रही थीं।
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