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इन पंक्तियों की व्याख्या कीजिए-बथुआ साग खाकर कब तक जीऊँ? - Hindi (Elective)

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प्रश्न

इन पंक्तियों की व्याख्या कीजिए-
बथुआ साग खाकर कब तक जीऊँ?

संक्षेप में उत्तर

उत्तर

यह पंक्ति बड़ी बहुरिया तब कहती है, जब वह अपनी माँ को हरगोबिन के माध्यम से अपनी व्यथा सुनाने के लिए भेजती है। वह अपनी माली स्थिति से परेशान है। घर में खाने के लिए कुछ नहीं है। जो भी खाती है, उधार ही खाती है। बथुआ ऐसी हरी सब्जी होता है, जो खेतों तथा खाली स्थानों में यूहीं उग जाया करती है। बड़ी बहुरिया उसे खाकर ही जीवन व्यतीत करती है। अपनी माँ को अपने बुरे हाल दर्शाने के लिए वह यह कहती है कि बथुआ साग खाकर कब तक जीऊँ? अर्थात अब स्थिति यह है कि मेरे पास खाने के लिए यही बथुआ का साग बचा है।

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संवदिया
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अध्याय 2.04: फणीश्वरनाथ 'रेणु' (संवदिया) - प्रश्न-अभ्यास [पृष्ठ ११२]

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एनसीईआरटी Hindi - Antara Class 12
अध्याय 2.04 फणीश्वरनाथ 'रेणु' (संवदिया)
प्रश्न-अभ्यास | Q 3. (ग) | पृष्ठ ११२

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