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प्रश्न
कविता की अंतिम चार पंक्तियों का अर्थ लिखो।
बात बेबात कोई चुभने लगे तो,
बदलकर उसे मोड़ना सीख लीजे।
ये किसने कहा होंठ सीकर के बैठो,
जरूरत पे मुँह खोलना सीख लीजे।
उत्तर
कवि पहली दो पंक्तियों में कहता है कि यदि कोई छोटी-बड़ी बात आपके हृदय को कष्ट पहुँचाए, तो उसे मोड़ना चाहिए अर्थात उसे भुलाने या उसकी नकारात्मकता के बजाय उसके सकारात्मक पहलुओं पर विचार करना चाहिए। कवि के अनुसार अनायास ही परेशान करने वाली बातों को सोचने से बेहतर है, उस परेशानी को दूर करने या उसके सकारात्मक पहलुओं पर विचार कर स्वयं के हौसले को बुलंद करने का प्रयास करना चाहिए। अंतिम दो पंक्तियों में कवि कहता है कि यह कोई नहीं कहता है कि अपने होंठ सिलकर बैठो अर्थात किसी भी बात पर अपनी प्रतिक्रिया मत दो, बल्कि जरूरत के समय अपना मत व्यक्त करना आना चाहिए। कवि के अनुसार हमेशा अपनी जुबाँ पर ताला लगाना न ही उचित है और न ही कोई ऐसी सलाह देता है। अत: आवश्यकता पड़ने पर प्रतिक्रिया देना बहुत जरूरी है।
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