मराठी
महाराष्ट्र राज्य शिक्षण मंडळएस.एस.सी (इंग्रजी माध्यम) इयत्ता ८ वी

कविता की अंतिम चार पंक्‍तियों का अर्थ लिखो। बात बेबात कोई चुभने लगे तो, बदलकर उसे मोड़ना सीख लीजे। ये किसने कहा होंठ सीकर के बैठो, जरूरत पे मुँह खोलना सीख लीजे। - Hindi (Second/Third Language) [हिंदी (दूसरी/तीसरी भाषा)]

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प्रश्न

कविता की अंतिम चार पंक्‍तियों का अर्थ लिखो।

बात बेबात कोई चुभने लगे तो,
बदलकर उसे मोड़ना सीख लीजे।

ये किसने कहा होंठ सीकर के बैठो,
जरूरत पे मुँह खोलना सीख लीजे।

थोडक्यात उत्तर

उत्तर

कवि पहली दो पंक्तियों में कहता है कि यदि कोई छोटी-बड़ी बात आपके हृदय को कष्ट पहुँचाए, तो उसे मोड़ना चाहिए अर्थात उसे भुलाने या उसकी नकारात्मकता के बजाय उसके सकारात्मक पहलुओं पर विचार करना चाहिए। कवि के अनुसार अनायास ही परेशान करने वाली बातों को सोचने से बेहतर है, उस परेशानी को दूर करने या उसके सकारात्मक पहलुओं पर विचार कर स्वयं के हौसले को बुलंद करने का प्रयास करना चाहिए। अंतिम दो पंक्तियों में कवि कहता है कि यह कोई नहीं कहता है कि अपने होंठ सिलकर बैठो अर्थात किसी भी बात पर अपनी प्रतिक्रिया मत दो, बल्कि जरूरत के समय अपना मत व्यक्त करना आना चाहिए। कवि के अनुसार हमेशा अपनी जुबाँ पर ताला लगाना न ही उचित है और न ही कोई ऐसी सलाह देता है। अत: आवश्यकता पड़ने पर प्रतिक्रिया देना बहुत जरूरी है।

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पद्य (8th Standard)
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पाठ 1.6: जरा प्यार से बोलना सीख लीज - सूचना नुसार कृतियाँ करो [पृष्ठ १५]

APPEARS IN

बालभारती Hindi - Sulabhbharati 8 Standard Maharashtra State Board
पाठ 1.6 जरा प्यार से बोलना सीख लीज
सूचना नुसार कृतियाँ करो | Q (४) | पृष्ठ १५

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एक शब्‍द में उत्‍तर लिखो :

प्रतिदिन सुनने/सुनाने योग्‍य नाम - ______


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कृति पूर्ण करो :

बगिया की शान -

  • ______
  • ______

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अंतिम चार पंक्‍तियों का अर्थ लिखो।

चख-चख जीवन मधुरस प्रतिक्षण
विपुल मनोवैभव कर संचित,
जन मधुकर अनुभूति द्रवित जब
करते भव मधु छत्र विनिर्मित
नहीं प्रार्थना इससे शुचितर !


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