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प्रश्न
किसी अभिक्रिया की आणविकता शून्य क्यों नहीं हो सकती?
उत्तर
किसी प्रारंभिक पद में भाग लेने वाले अणुओं की संख्या आण्विकता होती है। इसके लिए कम से कम एक अणु की आवश्यकता होती है। परिणामस्वरुप आण्विकता का न्यूनतम मान एक होता है।
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ताप में 293 K से 313 K तक वृद्धि करने पर किसी अभिक्रिया का वेग चार गुना हो जाता है। इस अभिक्रिया के लिए सक्रियण ऊर्जा की गणना यह मानते हुए कीजिए कि इसका मान ताप के साथ परिवर्तित नहीं होता।
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
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\[\ce{A(g) + 2B(g) -> 2C(g)}\]
किसी एक अभिक्रियक की सांद्रता स्थिर रखते हुए 'A' अथवा 'B' की सांद्रता में परिवर्तन किया गया और वेग को प्रारंभिक संद्रता के कारक के रूप में मापा गया। निम्नलिखित परिणाम प्राप्त हुए। इस अभिक्रिया के वेग समीकरण के लिए सही विकल्प चुनिए।
प्रयोग | [A] की प्रारंभिक सांद्रता/mol L-1 |
[B] की प्रारंभिक सांद्रता/mol L-1 |
[C] के बनने की प्रारंभिक दर/mol L-1 s-1 |
1. | 0.30 | 0.30 | 0.10 |
2. | 0.30 | 0.60 | 0.40 |
3. | 0.60 | 0.30 | 0.20 |
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