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लेखक ने फ़ादर बुल्के को 'मानवीय करुणा की दिव्य चमक' क्यों कहा है? - Hindi Course - A

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प्रश्न

लेखक ने फ़ादर बुल्के को 'मानवीय करुणा की दिव्य चमक' क्यों कहा है?

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उत्तर

फ़ादर बुल्के मानवीय करुणा की प्रतिमूर्ति थे। उनके मन में सभी के लिए प्रेम भरा था जो कि उनके चेहरे पर स्पष्ट दिखाई देता था। विपत्ति की घड़ी में वे सांत्वना के दो बोल द्वारा किसी भी मनुष्य का धीरज बाँधते थे। स्वयं लेखक की पत्नि तथा पुत्र की मृत्यु पर फ़ादर बुल्के ने उन्हें सांत्वना दी थी। किसी भी मानव का दु:ख उनसे देखा नहीं जाता था। उसके कष्ट दूर करने के लिए वे यथाशक्ति प्रयास करते थे।

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मानवीय करुणा की दिव्य चमक
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अध्याय 13: सर्वेश्वर दयाल सक्सेना - मानवीय करुणा की दिव्या चमक - प्रश्न-अभ्यास [पृष्ठ ८८]

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एनसीईआरटी Hindi - Kshitij Part 2 Class 10
अध्याय 13 सर्वेश्वर दयाल सक्सेना - मानवीय करुणा की दिव्या चमक
प्रश्न-अभ्यास | Q 5 | पृष्ठ ८८

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