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Chapters
2: तुलसीदास - राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद
3: देव - सवैया और कवित्त
4: जयशंकर प्रसाद - आत्मकथ्य
5: सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' - उत्साह और अट नहीं रही है
6: नागार्जुन - यह दंतुरहित मुस्कान और फसल
7: गिरिजाकुमार माथुर - छाया मत छूना
8: ऋतुराज - कन्यादान
9: मंगलेश डबराल - संगतकार
10: स्वयं प्रकाश - नेताजी का चश्मा
11: रामवृक्ष बेनीपुरी - बालगोबिन भगत
12: यशपाल - लखनवी अंदाज़
▶ 13: सर्वेश्वर दयाल सक्सेना - मानवीय करुणा की दिव्या चमक
14: मन्नू भंडारी - एक कहानी यह भी
15: महावीरप्रसाद द्विवेदी - स्त्री शिक्षा के विरोधी कुतर्कों का खंडन
16: यतींद्र मिश्र - नौबतखाने में इबादत
17: भदंत आनंद कौसल्यायन - संस्कृति

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Solutions for Chapter 13: सर्वेश्वर दयाल सक्सेना - मानवीय करुणा की दिव्या चमक
Below listed, you can find solutions for Chapter 13 of CBSE NCERT for Hindi - Kshitij Part 2 Class 10.
NCERT solutions for Hindi - Kshitij Part 2 Class 10 13 सर्वेश्वर दयाल सक्सेना - मानवीय करुणा की दिव्या चमक प्रश्न-अभ्यास [Pages 88 - 89]
फ़ादर की उपस्थिति देवदार की छाया जैसी क्यों लगती थी?
फ़ादर बुल्के भारतीय संस्कृति के एक अभिन्न अंग हैं, किस आधार पर ऐसा कहा गया है?
पाठ में आए उन प्रसंगों का उल्लेख कीजिए जिनसे फ़ादर बुल्के का हिंदी प्रेम प्रकट होता है?
इस पाठ के आधार पर फ़ादर कामिल बुल्के की जो छवि उभरती है उसे अपने शब्दों में लिखिए।
लेखक ने फ़ादर बुल्के को 'मानवीय करुणा की दिव्य चमक' क्यों कहा है?
फ़ादर बुल्के ने संन्यासी की परंपरागत छवि से अलग एक नयी छवि प्रस्तुत की है, कैसे?
आशय स्पष्ट कीजिए -
नम आँखों को गिनना स्याही फैलाना है।
आशय स्पष्ट कीजिए -
फ़ादर को याद करना एक उदास शांत संगीत को सुनने जैसा है।
आपके विचार से बुल्के ने भारत आने का मन क्यों बनाया होगा?
'बहुत सुंदर है मेरी जन्मभूमि - रेम्सचैपल।'- इस पंक्ति में फ़ादर बुल्के की अपनी जन्मभूमि के प्रति कौन-सी भावनाएँ अभिव्यक्त होती हैं? आप अपनी जन्मभूमि के बारे में क्या सोचते हैं?
मेरा देश भारत विषय पर 200 शब्दों का निबंध लिखिए।
आपका मित्र हडसन एंड्री ऑस्ट्रेलिया में रहता है। उसे इस बार की गर्मी की छुट्टियों के दौरान भारत के पर्वतीय प्रदेशों के भ्रमण हेतु निमंत्रित करते हुए पत्र लिखिए।
निम्नलिखित वाक्यों में समुच्यबोध छाँटकर अलग लिखिए -
(क) तब भी जब वह इलाहाबाद में थे और तब भी जब वह दिल्ली आते थे।
(ख) माँ ने बचपन में ही घोषित कर दिया था कि लड़का हाथ से गया।
(ग) वे रिश्ता बनाते थे तो तोड़ते नहीं थे।
(घ) उनके मुख से सांत्वना के जादू भरे दो शब्द सुनना एक ऐसी रोशनी से भर देता था जो किसी गहरी तपस्या से जनमती है।
(ङ) पिता और भाइयों के लिए बहुत लगाव मन में नहीं था लेकिन वो स्मृति में अकसर डूब जाते।
NCERT solutions for Hindi - Kshitij Part 2 Class 10 13 सर्वेश्वर दयाल सक्सेना - मानवीय करुणा की दिव्या चमक अतिरिक्त प्रश्न
फ़ादर बुल्के की मृत्यु से लेखक आहत क्यों था?
लेखक ने फ़ादर का शब्द चित्र किस तरह खींचा है?
‘परिमल’ क्या है? लेखक को परिमल के दिन क्यों याद आते हैं?
फ़ादर का सान्निध्य पाकर लेखक को ऐसा क्यों लगन्ना कि वह किसी देवदारु वृक्ष की छाया में खड़ा हो?
फ़ादर की पारिवारिक पृष्ठभूमि और उनका स्वभाव भी किसी सीमा तक उन्हें संन्यासी बनाने में सहायक सिद्ध हुई’–स्पष्ट कीजिए।
संन्यासी बनने से पूर्व फ़ादर ने धर्म गुरु के सामने क्या शर्त रखी और क्यों?
भारत आने के लिए पूछने पर फ़ादर क्या जवाब देते थे?
फ़ादर बुल्के ने भारत में बसने के लिए क्या आवश्यक समझा? उन्हें किस तरह हासिल किया?
अथवा
भारत आने पर फ़ादर द्वारा शिक्षा-दीक्षा प्राप्ति के सोपानों का क्रमिक वर्णन कीजिए।
‘संन्यासी होने के बाद भी फ़ादर का अपनी माँ से स्नेह एवं प्रेम कम न हुआ’–स्पष्ट कीजिए।
फ़ादर बुल्के ने हिंदी के उत्थान के लिए क्या-क्या प्रयास किए?
‘मानवीय करुणा की दिव्य चमक’ पाठ के आधार पर फ़ादर की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
फ़ादर पास्कल ने ऐसा क्यों कहा कि इस धरती से ऐसे और रत्न पैदा हों?
‘मानवीय करुणा की दिव्य चमक’ नामक पाठ में निहित संदेश स्पष्ट कीजिए।
Solutions for 13: सर्वेश्वर दयाल सक्सेना - मानवीय करुणा की दिव्या चमक

NCERT solutions for Hindi - Kshitij Part 2 Class 10 chapter 13 - सर्वेश्वर दयाल सक्सेना - मानवीय करुणा की दिव्या चमक
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