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प्रश्न
नीचे दी गई क्षय-योजना में, γ-क्षयों की विकिरण आवृत्तियाँ एवं β-कणों की अधिकतम गतिज ऊर्जाएँ ज्ञात कीजिए। दिया है:
m(198Au) = 197.968233 u
m(198Hg) =197.966760 u
उत्तर
चित्र से, E1 = \[\ce{_{80}^{198}{Hg}}\] की निम्नतम ऊर्जा स्तर में ऊर्जा = 0 MeV
E2 = \[\ce{_{80}^{198}{Hg}}\] की प्रथम उत्तेजित अवस्था में ऊर्जा = 0.412 MeV
E3 = \[\ce{_{80}^{198}{Hg}}\] की द्वितीय उत्तेजित अवस्था में ऊर्जा = 1.088 MeV
माना उत्सर्जित γ फोटॉनों (γ1, γ2 व γ3) की आवृत्तियाँ क्रमशः ν1,ν2 व ν3 हैं।
तब `"v"_1 = (Delta "E")/"h" = ("E"_3 - "E"_1)/"h" = (1.088 xx 1.6 xx 10^-13
"J" - 0)/(6.62 xx 10^-34)`
= 2.63 × 1020 Hz
`"v"_2 = ("E"_2 - "E"_1)/"h" = (0.412 xx 1.6 xx 10^-13 "J" - 0)/(6.62 xx 10^-34)`
= 9.96 × 1019 Hz
`"v"_3 = ("E"_3 - "E"_2)/"h" = ((1.088 - 0.412) xx 1.6 xx 10^-13 "J")/(6.62 xx 10^-34)`
= 1.63 × 1020 Hz
जबकि इन फोटॉनों की ऊर्जाएँ निम्नलिखित हैं
E (γ1) = E3 – E1 = 1.088 MeV
E (γ2)= E2– E1 = 0.412 Mev
E (γ3) = E3 – E2 = 1.088- 0.412 = 0.676 MeV
\[\ce{_{79}^{198}{Au}}\] के β–1-क्षय में Au नाभिक पहले एक β कण उत्सर्जित करता है तत्पश्चात् γ1-फोटॉन को । उत्सर्जित करके \[\ce{_{80}^{198}{Hg}}\] नाभिक में बदल जाता है; अतः
\[\ce{_{79}^{198}{Au}}\] के β–1-क्षय का समीकरण निम्नलिखित है।
\[\ce{_79^198Au -> _80^198Hg + _(-1)^0e + E(\beta_1^-) + E(\gamma_1)}\]
यहाँ E(β–1) तथा E (γ1) इन कणों की ऊर्जाएँ हैं। स्पष्ट है कि E(β–1) का मान अधिकतम होगा यदि \[\ce{_{80}^{198}{Hg}}\] की गतिज ऊर्जा शून्य हो। अर्थात् अभिक्रिया की सम्पूर्ण ऊर्जा केवल β-कण तथा γ-कोटॉन की ऊर्जा के रूप में निकलें।
∴ β -कण की महत्तम गतिज ऊर्जा
`"E"(beta_1^-) = "Q" - "E"(gamma_1)`
`= ["m"_"N" (""_79^198"Au") - "m"_"N"(""_80^198"Hg") - "m"_"e"] xx 931.5 " MeV" - "E"(gamma_1)`
`= ["m"(""_79^198"Au") - 79"m"_"e" - "m"(""_80^198"Hg") + 80 "m"_"e" - "m"_"e"] xx 931.5 - "E"(gamma_1)`
`= ["m" (""_79^198"Au") - "m" (""_80^198"Hg")] xx 931.5 - "E"(gamma_1)`
= [197.968233 - 197.966760] × 931.5 - 1.088
= 0.001473 × 931.5 - 1.088
= (1.372 - 1.088) MeV = 0.284 MeV
\[\ce{_{79}^{198}{Au}}\] के β–2क्षय में Au नांभिक पहले β-कण उत्सर्जित करता है तत्पश्चात् γ2 फोटॉन उत्सर्जित करता हुआ \[\ce{_{80}^{198}{Hg}}\] नाभिक में बदल जाता है।
इसे क्षय का समक्रण निम्नलिखित है
\[\ce{_79^198Au -> _80^198Hg + _(-1)^0e + E(\beta_2^-) + E(\gamma_2)}\]
∴ उत्सर्जित \[\ce{\beta_2^-}\] कण की महत्तम गतिज ऊर्जा
`"E"(beta_2^-) = "Q" - "E"(gamma_2)`
`= ["m")"N"(""_79^198 "Au") - "m"_"N" (""_80^198 "Hg") + 80 "m"_"e" - "m"_"e"] xx 931.5 - "E"(gamma_2)`
`= ["m"(""_79^198 "Au") - 79 "m"_"e" - "m"(""_80^198 "Hg") + 80"m"_"e" - "m"_"e"] xx 931.5 - "E"(gamma_2)`
`= ["m"(""_79^198 "Au") - "m"(""_80^198 "Hg")] xx 931.5 - "E"(gamma_2)`
= [197.968233 - 197.966760] × 931.5 - 0.412
= 1.372 - 0.676
= 0.960 MeV