Advertisements
Advertisements
प्रश्न
सूर्य के अभ्यंतर में (a) 1kg हाइड्रोजन के संलयन के समय विमुक्त ऊर्जा का परिकलन कीजिए। (b) विखण्डन रिएक्टर में 1.0 kg \[^{235}{\text{U}}\] के विखण्डन में विमुक्त ऊर्जा का परिकलेन कीजिए। (c) प्रश्न के खण्ड (a) तथा (b) में विमुक्त ऊर्जाओं की तुलना कीजिए।
उत्तर
(a) सूर्य के अभ्यन्तर में हाइड्रोजन के 4 परमाणु निम्नलिखित अभिक्रिया के अनुसार संलयित होकर हीलियम परमाणु का निर्माण करते हैं तथा लगभग 26 Mev ऊर्जा उत्पन्न होती है।
\[\ce{4 _1^1H -> _2^4He + 2 _{+1}^0e + 2v + 26 MeV}\]
∵ हाइड्रोजन का ग्राम परमाणु द्रव्यमान = 1 g
∴ 1 g हाइड्रोजन में उपस्थित परमाणुओं की संख्या = 6.02 × 1023
∴ 1 kg (= 1000 g) में उपस्थित परमाणुओं की संख्या = 6.02 × 1026
∵ हाइड्रोजन के 4 परमाणुओं से उत्पन्न ऊर्जा = 26 MeV
∴ 1 परमाणु से उत्पन्न ऊर्जा `= 26/4` MeV
∴ 6.02 × 1026 परमाणुओं से उत्पन्न ऊर्जा = `(26 xx 6.02 xx 10^26)/4`
∴ सूर्य के अभ्यंतर में हाइड्रोजन के संलयन से उत्पन्न ऊर्जा = 39.13 × 1026 MeV
(b) हम जानते है कि विखंड रिएक्टर में निम्न अभिक्रिया के अनुसार \[\ce{_92^235 U}\] के एक परमाणु के विखंड से लगभग 200 MeV ऊर्जा उत्पन्न होती है।
\[\ce{_92^235U + _0^1n -> _56^141 Ba + _36^92 Kr + 3 _0^1n + 200 MeV}\] ऊर्जा
∵ 235 यूरेनियम में परमाणुओं की संख्या = 6.02 × 1023
∴ 1g यूरेनियम में परमाणुओं की संख्या = `(6.02 xx 10^23)/235`
∴ 1 kg (= 1000 g) यूरेनियम में परमाणुओं की संख्या = `(6.02 xx 10^23 xx 1000)/235`
= 25.62 × 1023
∵ 1 परमाणु के विखंड से प्राप्त ऊर्जा = 200 MeV
∴ 25.62 × 1023 परमाणुओं से प्राप्त ऊर्जा = 200 × 25.62 × 1023
= 5.124 × 1026 MeV
या 1 kg \[\ce{_92^235 U}\] के विखंड से प्राप्त ऊर्जा = 5.12 × 1026 MeV
(c) `"1 kg हाइड्रोजन के संलयन से प्राप्त ऊर्जा"/(1 " kg" ^235"U" "के विखंड से प्राप्त ऊर्जा") = (39.13 xx 10^26)/(5.12 xx 10^26)`
= 7.64 ≈ 8
अर्थात 1 kg हाइड्रोजन के संलयन से प्राप्त ऊर्जा, 1 kg 235U के विखंडन से प्राप्त ऊर्जा की लगभग 8 गुनी है।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
माना कि हम \[\ce{_{26}^{56}{Fe}}\] नाभिक के दो समान अवयवों \[\ce{_{13}^{28}{Al}}\] में विखण्डन पर विचार करें।
क्या ऊर्जा की दृष्टि से यह विखण्डन सम्भव है? इस प्रक्रम का Q-मान ज्ञात करके अपना तर्क प्रस्तुत करें।
दिया है : m(\[\ce{_{26}^{56}{Fe}}\]) = 55.93494 u एवं m(\[\ce{_{13}^{28}{Al}}\]) = 27.98191 u.
तीव्र न्यूट्रॉनों द्वारा \[\ce{_{92}^{238}{U}}\] के विखण्डन पर विचार कीजिए। किसी विखण्डन प्रक्रिया में प्राथमिक अंशों (Primary fragments) के बीटा-क्षय के पश्चात कोई न्यूट्रॉन उत्सर्जित नहीं होता तथा \[\ce{_{58}^{140}{P}}\] तथा \[\ce{_{34}^{99}{Ru}}\] अन्तिम उत्पाद प्राप्त होते हैं। विखण्डन प्रक्रिया के लिए के मान का परिकलन कीजिए। आवश्यक आँकड़े इस प्रकार हैं
m(\[\ce{_{92}^{238}{U}}\]) = 238.05079 u
m(\[\ce{_{58}^{140}{Ce}}\]) = 139.90543 u
m(\[\ce{_{34}^{99}{Ru}}\]) = 98.90594 u
D.T अभिक्रिया (ड्यूटीरियम-ट्राइटियम संलयन), \[\ce{_{1}^{2}{H} + _{1}^{3}{H} → _{2}^{4}{He} + n}\] पर विचार कीजिए।
(a) नीचे दिए गए आँकड़ों के आधार पर अभिक्रिया में विमुक्त ऊर्जा का मान Mev में ज्ञात कीजिए।
`"m"(""_1^2 "H")` = 2.014102 u
`"m"(""_1^3 "H")` = 3.016049 u
(b) इयूटीरियम एवं ट्राइटियम दोनों की त्रिज्या लगभग 1.5 fm मान लीजिए। इस अभिक्रिया में, दोनों नाभिकों के मध्य कूलॉम प्रतिकर्षण से पार पाने के लिए कितनी गतिज ऊर्जा की आवश्यकता है? अभिक्रिया प्रारम्भ करने के लिए गैसों (0 तथा 1 गैसें) को किस ताप तक ऊष्मित कि या जाना चाहिए?
(संकेत : किसी संलयन क्रिया के लिए आवश्यक गतिज ऊर्जा = संलयन क्रिया में संलग्न कणों की औसत तापीय गतिज ऊर्जा = 2 (3KT/2); K: बोल्ट्ज़मान नियतांक तथा T = परम ताप)