Advertisements
Advertisements
प्रश्न
निम्नलिखित पंक्ति का काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
पति बर्नै चारमुख पूत बर्नै पंच मुख नाती बर्नै षटमुख तदपि नई-नई।
उत्तर
प्रस्तुत पंक्तियों में कवि सरस्वती के बखान को कहने में स्वयं को असमर्थ पाता है। इसमें उनकी महिमा को अतुलनीय बताया है। उसके अनुसार सरस्वती का बखान अकथनीय है। ब्रजभाषा का बहुत सुंदर प्रयोग है। 'नई-नई' में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार की छटा दिखाई देती है। कवि ने इसमें अतिशयोक्ति अलंकार का प्रयोग किया है। तत्सम शब्दों 'पाँचमुख', 'षटमुख' तथा 'तदपि' आदि का प्रयोग किया गया है।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
देवी सरस्वती की उदारता का गुणगान क्यों नहीं किया जा सकता?
चारमुख, पाँचमुख और षटमुख किन्हें कहा गया है और उनका देवी सरस्वती से क्या संबंध है?
कविता में पंचवटी के किन गुणों का उल्लेख किया गया है?
तीसरे छंद में संकेतित कथाएँ अपने शब्दों में लिखिए?
निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए।
भावी भूत बर्तमान जगत बखानत है 'केसोदास' क्यों हू ना बखानी काहू पै गई।
निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए।
अघओघ की बेरी कटी बिकटी निकटी प्रकटी गुरूजान-गटी।
निम्नलिखित पंक्ति का काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
चहुँ ओरनि नाचति मुक्तिनटी गुन धूरजटी वन पंचवटी।
निम्नलिखित पंक्ति का काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
सिंधु तर यो उनको बनरा तुम पै धनुरेख गई न तरी।
निम्नलिखित पंक्तिय का काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
तेलन तूलनि पूँछि जरी न जरी, जरी लंक जराई-जरी।