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प्रश्न
निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओ के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
वास्तव में भाई से यह जानने के उपरांत कि उक्त सज्जन ही राजेंद्र बाबू हैं, मुझे अभिवादन का ध्यान आया। पहली दृष्टि में ही जो आकृति स्मृति में अंकित हो गई थी, उसमें इतने वर्षों ने न कोई रेखा जोड़ी है और न कोई नया रंग भरा है। सत्य में से जैसे कुछ घटाना या जोड़ना संभव नहीं रहता वैसे ही सच्चे व्यक्तित्व में भी कुछ जोडना - घटाना संभव नहीं है। काले घने पर छोटे कटे हुए बाल, चौड़ा मुख, चौड़ा माथा, घनी भृकुटियों के नीचे बड़ी आँखें, मुख के अनुपात में कुछ भारी नाक, कुछ गोलाई लिए चौड़ी ठुड्डी, कुछ मोटे नर सुडौल ओंठ, श्यामल झाँई देता हुआ गेहुआँ वर्ण, बड़ी - बड़ी ग्रामीणों जैसी मूँछें जो ऊपर के ओंठ को ही नहीं ढक नेती थीं, नीचे के ओंठ पर भी रोमिल आवरण डाले हुए थीं। हाथ, पैर, शरीर सबमें लंबाई की ऐसी विशेषता थी जो दृष्टि को अनायास आकर्षित कर लेती थी। |
- जोड़ियाँ मिलाकर फिर से लिखिए: [2]
'अ' 'आ' (1) वर्ण मोटे सुडौल (2) नाक गेहुआँ (3) ओंठ चौड़ा (4) मुख भारी गोलाई - निम्नलिखित शब्दों के लिंग पहचानकर लिखिए: [2]
- दृष्टि - .............
- अभिवादन - .............
- व्यक्तित्व - .............
- आँख - .............
- 'शारीरिक स्वास्थ्य ही सच्ची संपत्ति है' इस विषय पर 2 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए। [2]
उत्तर
-
'अ' 'आ' (1) वर्ण गेहुआँ (2) नाक भारी गोलाई (3) ओंठ मोटे सुडौल (4) मुख चौड़ा -
- दृष्टि - स्त्रीलिंग
- अभिवादन - पुल्लिंग
- व्यक्तित्व - पुल्लिंग
- आँख - स्त्रीलिंग
- शारीरिक स्वास्थ्य ही सच्ची संपत्ति है, क्योंकि यदि हमारा शरीर स्वस्थ रहेगा, तो हम जीवन में सभी कार्यों को अच्छे से कर पाएंगे। स्वस्थ रहने के लिए हमें नियमित व्यायाम करना चाहिए, संतुलित आहार लेना चाहिए और सकारात्मक सोच रखनी चाहिए। स्वास्थ्य के बिना सारी दौलत भी बेकार हो जाती है। इसलिए, हमें अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना चाहिए।