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प्रश्न
‘पानी के असंगत व्यवहार के कारण चट्टाने फूटकर उसके टुकड़े होते हैं’ यह कथन स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
शीत प्रधान क्षेत्रों में सर्दी के मौसम में वायुमंडल का तापमान कई बार 0°C से भी बहुत कम हो जाता है। सामान्यत: चट्टानों की दरारों में पानी संचित होता है। पानी के असंगत व्यवहार के कारण पानी का तापमान 4°C से कम होने पर पानी का प्रसरण होता है। कालांतर में उसके बर्फ बनने पर भी उसका आयतन अधिक हो जाता है। ऐसे समय चट्टानों की दरारों में पानी के कारण निर्मित दाब के कारण चट्टानें फूट जाती हैं, और उनके टुकड़े हो जाते हैं।
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