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'पराधीनता एक अभिशाप है' इस विषय पर दस से पंद्रह वाक्य लिखवाएँ। - Marathi (Second Language) [मराठी (द्वितीय भाषा)]

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प्रश्न

'पराधीनता एक अभिशाप है' इस विषय पर दस से पंद्रह वाक्य लिखवाएँ।

लघु उत्तरीय

उत्तर

पराधीनता, अर्थात् दूसरों के अधीन रहना, मानव जीवन के लिए एक अभिशाप के समान है। तुलसीदास जी ने सही कहा है, "पराधीन सपने हुँ सुख नाहीं," अर्थात पराधीन व्यक्ति स्वप्न में भी सुख का अनुभव नहीं कर सकता। पराधीनता में व्यक्ति अपनी इच्छाओं, विचारों और कार्यों के लिए स्वतंत्र नहीं होता, जिससे उसकी आत्मनिर्भरता और सृजनशीलता बाधित होती है। ऐसे व्यक्ति का आत्मसम्मान और आत्मविश्वास धीरे-धीरे क्षीण हो जाता है। इतिहास साक्षी है कि पराधीनता ने समाजों और राष्ट्रों की प्रगति को अवरुद्ध किया है। भारत ने भी वर्षों तक पराधीनता का दंश झेला, जिसके परिणामस्वरूप देश की स्वतंत्रता, संस्कृति और अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा। स्वतंत्रता के बिना, न तो व्यक्ति और न ही राष्ट्र का समुचित विकास संभव है। इसलिए, प्रत्येक व्यक्ति को स्वाधीनता का महत्व समझना चाहिए और पराधीनता से बचने का प्रयास करना चाहिए।

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अध्याय 1.7: मेरे देश के लाल - अंतःपाठ प्रश्न [पृष्ठ २२]

APPEARS IN

बालभारती Integrated 7 Standard Part 2 [Hindi Medium] Maharashtra State Board
अध्याय 1.7 मेरे देश के लाल
अंतःपाठ प्रश्न | Q ४. | पृष्ठ २२
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