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प्रश्न
‘पुस्तक मेले में दो घंटे’ विषय पर अस्सी से सौ शब्दों में निबंध लिखिए।
उत्तर
पुस्तक मेले में दो घंटे
पुस्तकें अत्यंत मूल्यवान होती हैं और हमारे लिए सच्चे मित्र की तरह होती हैं। वे हमारे ज्ञान को बढ़ाती हैं, इसीलिए मैं पुस्तकों को पढ़ना बहुत पसंद करता हूँ। मैं अक्सर अपने स्कूल के पुस्तकालय में जाकर विभिन्न प्रकार की पुस्तकें पढ़ता हूँ। आजकल कई जगहों पर पुस्तक प्रदर्शनियाँ भी आयोजित की जाती हैं, जहाँ विभिन्न विषयों की पुस्तकें आसानी से मिल जाती हैं। पिछले महीने, मेरे स्कूल के पास एक बड़े मैदान में एक सप्ताह तक ऐसी ही एक पुस्तक प्रदर्शनी लगी थी। हमारे शिक्षक ने प्रधानाध्यापक से इस प्रदर्शनी के बारे में बात की और विद्यार्थियों को वहां ले जाने की अनुमति मांगी। अनुमति मिलने पर, शिक्षक हमें भोजन अवकाश के बाद प्रदर्शनी में ले गए।
पुस्तक मेला एक ऐसी जगह है जहाँ किताबों की भरमार होती है और पढ़ाई के प्रति लगाव बढ़ता है। इस विशिष्ट अनुभव के दौरान, मैंने एक पुस्तक मेले में समय व्यतीत किया जिसने मेरी जिज्ञासा को पूरी तरह से संतुष्ट किया। शुरुआती दो घंटों में, मैंने विभिन्न शैलियों की किताबें एकत्रित कीं। यहाँ आए विविध लेखकों की रचनाएँ मेरे विचारों को बदलने में सहायक रहीं और नई सोच से परिचित कराया। आलोचना, कला, विज्ञान, और साहित्य जैसे अनेक विषयों पर किताबें उपलब्ध थीं। पुस्तक मेला वह स्थान है जहाँ हर कोई अपनी पसंद के अनुसार कुछ नया खोज सकता है। मैंने किताबें चुनते समय लेखकों की गहराई को समझने की कोशिश की और नए नजरिए प्राप्त किए।
इस मेले में मुझे अनेक महत्वपूर्ण शिक्षाएँ मिलीं, लेकिन सबसे जरूरी बात यह थी कि पुस्तकें केवल ज्ञान ही नहीं बढ़ातीं, बल्कि हमारी भावनाओं को व्यवस्थित करने में भी मदद करती हैं। इस अवसर पर, मैंने पुस्तकों के माध्यम से अपने जीवन को सुधारने की गहराई को पहचाना। जो दो घंटे मैंने यहाँ बिताए, वो सुधार और शिक्षा के लिए समर्पित थे, जिसने मेरे जीवन को नई प्रेरणा और दिशा प्रदान की। इस प्रकार, पुस्तक मेला मेरे लिए एक अनोखा और अभिनव अनुभव रहा, जिसने मेरी सोच को विस्तृत किया और नए आयाम दिखाए।
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संबंधित प्रश्न
निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए-
अमृता प्रीतम - आप औरत को औरत के तौर पर महत्त्व नहीं देते ? केवल माँ के तौर पर महत्त्व देते हैं ?
शोभा सिंह - मैं रचनात्मक शक्ति के सम्बन्ध में कह रहा हूँ।
जैसे अमृता का महत्त्व उसके लेखिका होने के कारण है, शोभा सिंह का चित्रकार होने के कारण, उसी तरह औरत का महत्त्व उसके माँ होने के कारण है। उसकी रचनात्मक शक्ति उसके माँ होने में है। अपने अस्तित्व की धरती में वह एक बीज को धारण करने के लिए माँ-बाप, बहन- भाई, घर-सहेलियाँ, सब कुछ छोड़कर वह एक नई और ऊपरी धरती पर चली जाती है। यह कितनी बड़ी साधना है यह उसकी कला है, उसकी दैवी शक्ति उसका ज्ञान इसी जगह वह ' जीनियस ' है। |
(1) कृति पूर्ण कीजिए - (2)
(2) (i) लिंग परिवर्तन करके वाक्य फिर से लिखिए : (1)
केवल माँ के तौर पर महत्त्व देते हैं।
(ii) निम्तलिखित शब्दों के लिए गद्यांश यें आए समानार्थी शब्द ढूँढ़कर लिखिए। (1)
- नारी - ______
- बल - ______
(3) स्त्री होने का महत्त्व 20 से 30 शब्दों में समझाइए। (2)
‘रंगों का जीवन में बड़ा महत्त्व है’ उदाहरण सहित स्पष्ट लिखिए।
‘कला अभिव्यक्ति का माध्यम है’ अंतरजाल की सहायता से इसकी जानकारी इकट्ठा कर पढ़िए।
‘कलादीर्घा (आर्ट गैलरी) में बिताए हुए समय’ का अपना अनुभव अपने मित्रों को बताइए।
शोभा सिंह ने ‘सत्यम्, शिवम्, सुंदरम्’ का क्रम बदला है।
प्रश्नकर्ता के अनुसार हमारी धरती का यथार्थ बहुत भयानक नहीं है।
कलाकार की शक्ति उसके चिंतन में है।
शोभा सिंह कलाकार का कर्म एक छोटी-सी जलती हुई मोमबत्ती नहीं समझते।
कृति पूर्ण कीजिए:
उचित जोड़ियाँ मिलाइए:
अ | उत्तर | आ |
चित्रकार | ______ | माँ |
लेखक | ______ | शोभा सिंह |
ईश्वर | ______ | अमृता प्रीतम |
जीनियस | ______ | बेगाना पुत्र |
कलाकार |
सुंदरता के लिए ______ सबसे पहली अवस्था है।
हमारी धरती का ______ बहुत भयानक है।
कलाकार की शक्ति उसके ______ में है।
मैं रचनात्मक ______ के संबंध में कह रहा हूँ।
पाठ में प्रयुक्त ऐसे शब्द ढूँढ़कर लिखिए जिनका वचन परिवर्तन नहीं होता।
जैसे : वृक्ष = वृक्ष