Advertisements
Advertisements
प्रश्न
तालिकां पूरयत
धातवः | अर्थ : | लकार: | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
ग्रह (९ उ.) | स्वीकरोति | लट् | गृह्णामि | गृह्णीव: | ______ |
उत्तर
धातवः | अर्थ : | लकार: | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
ग्रह (९ उ.) | स्वीकरोति | लट् | गृह्णामि | गृह्णीव: | गृह्णीम : |
संबंधित प्रश्न
सङ्ख्याः अक्षरैः/अङ्कंः लिखत
४९ - ______
सङ्ख्याः अक्षै :/अङ्कंः लिखत ।
पञ्चाशीतिः - ______
सुचननुसारं कृतीः कुरुत ।
अहं प्रसन्ना भविष्यामि । (लृट् स्थाने लिङ् प्रयोगं कुरुत ।)
सुचननुसारं कृतीः कुरुत ।
भूमिः स्त्रीरूपं धृत्वा तस्य पुरतः प्रकटिता अभवत् ।(र्वकालवाचक त्वान्त अव्ययं निष्कासयत।)
सन्धिविग्रह कुरुत।
उदर एव ।
प्रश्रनिमांण करुत ।
सः वृक्षस्य पृष्ठतः निभृतं स्थितः।
सूचनानुसारं कृती: कुरुत।
भवानपि अपरिचितः एव आसीत्। (‘भवान्’ स्थाने ‘त्वं’ योजयत।)
सन्धिविग्रहं कुरुत।
मरणमस्तु ।
सन्धिविग्रहं कुरुत ।
आत्मनो मुखदोषेण
समासविग्रहं कुरुत-
समस्तपदम् | विग्रहवाक्यम् | समासनाम |
चिन्ताकुल : | ______ | ______ |
समासविग्रहं कुरुत
समस्तपदम् | विग्रहवाक्यम् | समासनाम |
लगुडहस्तः | ______ | ______ |
समासविग्रहं कुरुत
समस्तपदम् | विग्रहवाक्यम् | समासनाम |
नीतिनिपुणः | ______ | ______ |
समासविग्रहं कुरुत
समस्तपदम् | विग्रहवाक्यम् | समासनाम |
भुजगयमिता: | ______ | _____ |
सूचनानुसारं कृती: कुरुत ।
त्वं किम् इच्छसि ? (त्वम्’ इत्यस्य स्थाने ‘भवान्’ इति योजयत ।)
सूचनानुसारं कृती: कुरुत।
मे आत्मा कृतार्थतां लभताम्। (लङ्लकारे वाक्यं परिवर्तयत।)
सूचनानुसार कृती: कुरुत।
भवान् स्वीकरोतु। (‘भवान्’ स्थाने ‘त्वं’ योजयत।)
नामतालिकां पूरयत ।
ए.व. | द्विव. | ब.व. | विभक्तिः |
ग्राव्णे | ______ | ______ | चतुर्थी |
नामतालिकां पूरयत ।
ए.व. | द्विव. | ब.व. | विभक्तिः |
______ | ______ | बलवत : | द्वितीया |
क्रियापदतालिकां पूरयत
ए.व. | द्विव. | ब.व | पुरुष: | लकार : |
______ | धारयेथाम् | ______ | मध्यमः | लोट् |
क्रियापदतालिकां पूरयत
ए.व. | द्विव. | ब.व | पुरुष: | लकार : |
______ | ______ | चिन्तयामहे | उत्तमः | लोट् |
समासविग्रहं कुरुत
समस्तपदम् | विग्रहवाक्यम् | समासनाम |
सविनयम् | ______ | ______ |
समासविग्रहं कुरुत।
समस्तपदम् | विग्रहवाक्यम् | समासनाम |
सूक्ष्मकणाः | ______ | ______ |
समासविग्रहं कुरुत
समस्तपदम् | विग्रहवाक्यम् | समासनाम |
शिशिर ऋतुः | ______ | ______ |
समासविग्रहं कुरुत
समस्तपदम् | विग्रहवाक्यम् | समासनाम |
अश्मखण्डः | ______ | ______ |
समासविग्रहं कुरुत
समस्तपदम् | विग्रहवाक्यम् | समासनाम |
हस्तस्थम् | ______ | ______ |
समासविग्रहं कुरुत
समस्तपदम् | विग्रहवाक्यम् | समासनाम |
जपाकुसुमम् | ______ | _____ |
समासविग्रहं कुरुत
समस्तपदम् | विग्रहवाक्यम् | समासनाम |
परागकणाः | ______ | ______ |
नामतालिकां पूरयत
ए. व. | द्विव | ब.व. | विभक्तिः |
______ | दृग्भ्याम् | ______ | चतुर्थी |
प्रश्ननिर्माणं कुरुत।
महिला मयि पाषाणखण्डान् अक्षिपत् ।
प्रश्ननिर्माणं कुरुत।
गौः मञ्चं समागता ।
नाम-तालिकापूर्ति कुरुत
एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | विभक्तिः |
______ | ______ | धन्विभ्यः | पञ्चमी |
सन्धिविग्रहं कुरुत ।
ददर्शायतलोचना ।
धातु-तालिकां पूरयत
लकारा : | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | विभक्तिः |
लड् | ______ | ______ | अभवत् | प्रथमः |
धातु-तालिकां पूरयत
लकारा : | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | विभक्तिः |
लृट् | ______ | पश्यावः | ______ | उत्तमः |
सूचनानुसारं कृती: कुरुत।
यदा त्वं स्मरिष्यसि तदा एव त्वत्समीपमागमिष्यामि। (लकारं लिखत।)
सपासविग्रहं कुरुत ।
समस्तपदम् | विग्रहः | समासनाम |
सपरिवारम् | ______ | ______ |
समासविग्रहं कुरुत
समस्तपदम् | विग्रहः | समासनाम |
पूर्णानदी | ______ | ______ |
सूचनानुसारं कृती: कुरुत ।
राक्षसेभ्यः जनकस्य सुतां हत्वा पुरीं ययौ । (लङ्लकारे परिवर्तयत ।)
सूचनानुसारं कृती: कुरुत ।
अहं वाणिज्यशाखाया: स्नातकः । (बहुवचने परिवर्तयत ।)
सूचनानुसारं कृती: कुरुत ।
अहम् अध्ययने यत्नं करोमि । (वाक्यं विधिलिङ्लकारे परिवर्तयत ।)
सूचनानुसारं कृती: कुरुत ।
सः महोदयम् उपगम्य वदति।
(पूर्वकालवाचकं ल्यबन्त अव्ययं निष्कास्य वाक्यं लिखत।)
धातुसाधित-विशेषण-तालिकां पूरयत ।
धातुः | क्त | क्तवतु | कृत्याः | शतृ / शानच् |
मुच्-मुञ्च् (६ उ.प.) | ______ | ______ | मोचनीय: | मुञ्चन् |
धातुसाधित-विशेषण-तालिकां पूरयत ।
धातुः | क्त | क्तवतु | कृत्याः | शतृ / शानच् |
लिख् (२ प. प.) | लिखितः | ______ | लेखितव्यः | ______ |
धातुसाधित-विशेषण-तालिकां पूरयत ।
धातुः | क्त | क्तवतु | कृत्याः | शसेव्यःतृ / शानच् |
सेव् (१ आ. प.) | सेवितः | सेवितवान् | ______ | ______ |
धातुसाधित-विशेषण-तालिकां पूरयत ।
धातुः | क्त | क्तवतु | कृत्याः | शतृ / शानच् |
रभ् (१ आ.प.) | रब्धः | ______ | ______ | रभमाण : |
धातुसाधित-विशेषण-तालिकां पूरयत ।
धातुः | क्त | क्तवतु | कृत्याः | शतृ / शानच् |
प्र + विश् (६ उ.प.) | प्रविष्ट: | ______ | ______ | प्रविशन् |
धातुसाधित-विशेषण-तालिकां पूरयत ।
धातुः | क्त | क्तवतु | कृत्याः | शतृ / शानच् |
वद् (१ प.प.) | ______ | उदितवान् | वदनीयः | ______ |
सन्धिविग्रहं कुरुत।
तृणैर्गुणत्वमापनर्बध्यन्ते - ______
उचितं पर्यायं चित्वा वाक्यं पुनर्लिखत ।
एते सर्वेऽपि ______ सहभागिनः ।
समासविग्रहं कुरुत
समस्तपदम् | विग्रहः | समासनाम |
समुद्रसुता | ______ | ______ |
समासविग्रहं कुरुत
समस्तपदम् | विग्रहः | समासनाम |
निद्रामग्नः | ______ | ______ |
समासविग्रहं कुरुत
समस्तपदम् | विग्रहः | समासनाम |
समीपस्थः | ______ | ______ |
समासविग्रहं कुरुत
समस्तपदम् | विग्रहः | समासनाम |
अभ्युदयकृत् | ______ | ______ |
सर्वनामतालिकां पूरयत ।
एव् | द्विव | बव | विभक्तिः |
एतेन | ______ | ______ | तृतीया |
क्रियापद-तालिकां पूरयत।
एकवचनम् | द्विवचनम् |
बहुवचनम् |
पुरुषः | लकारः |
अकुरुथाः | अकुर्वाथाम् | ______ | मध्यमः | लङ् |
धातुसाधित -विशेषण- तालिकां पूरयत।
धातुः | क्त | क्तवन् | कृत्या | शत्/शानच् |
लम् (१ आ.प.) | ______ | लब्धवान् | लभनीयः | ______ |
सङ्ख्याः अङ्कैः लिखत ।
त्र्यशीतिः - ______।
सङ्ख्याः अङ्कैः लिखत ।
द्विषष्टिः - ______
सङ्ख्याः अक्षरैः लिखत -
८० - ______
सङ्ख्याः अक्षरैः लिखत -
४४ - ______
सङ्ख्याः अक्षरैः लिखत -
३२ -______
सङ्ख्याः अक्षरैः लिखत -
८२ - ______
सङ्ख्याः अक्षरैः लिखत -
८ - ______
सङ्ख्याः अक्षरैः लिखत -
२८ - ______
समासविग्रहं कुरुत
समस्तपदम् | विग्रहः | समासनाम |
मानवताधर्मः | ______ | ______ |
लकारं लिखत ।
तत्प्रा यतस्व । - ______
सङ्ख्याः अङ्कैः लिखत।
नव - ______
मञ्जूषातः क्रियापदानि धातुसाधित-विशेषणानि च पृथवकुरुत।
क्रियापदम् | धातुसाधित -विशेषणम् |
______ | ______ |
(मञ्जूषा - अकथयत्, मुक्तः, जानाति, भेतव्यम्, वहतु)
सङ्ख्या: अङ्कैः लिखत।
एकोनसप्ततिः -