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Arts (Hindi Medium) कक्षा १२ - CBSE Important Questions for Hindi (Elective)

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Hindi (Elective)
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भरत का आत्म परिताप उनके व्यक्तित्व के किस पक्ष की ओर संकेत करता है? वर्तमान में ऐसे व्यक्तित्व की आवश्यकता सिद्ध कीजिए।

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Chapter: [0.010700000000000001] तुलसीदास : (क) भरत-राम का प्रेम, (ख) पद
Concept: भरत-राम का प्रेम

बारहमासा का प्रतिपाद्य स्पष्ट कीजिए।

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Chapter: [0.0108] मलिक मुहम्मद जायसी : बारहमासा
Concept: बारहमासा

माघ के मास में विरहिणी के भावों को अपने शब्दों में लिखिए।

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Chapter: [0.0108] मलिक मुहम्मद जायसी : बारहमासा
Concept: बारहमासा

आशय स्पष्ट कीजिए -

जनम अबधि हम रूप निहारल नयन न तिलपित भेल॥

सेहो मधुर बोल स्रवनहि सूनल स्रुति पथ परस न गेल॥

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Chapter: [0.0109] विद्यापति : पद
Concept: विद्यापति

आशय स्पष्ट कीजिए।

अधर लगे हैं आनि करि कै पयान प्रान,
चाहत चलन ये सैंदेसो लै सुजान को।

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Chapter: [0.0111] घनानंद : कवित्त / सवैया
Concept: कवित्त

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प का चयन कीजिए -

चौधरी साहब एक खासे हिंदुस्तानी रईस थे। वसंत पंचमी होली इत्यादि, अवसरों पर उनके यहाँ खूब नाचरंग और उत्सव हुआ करते थे। उनकी हर एक अदा से रियासत और तबीयतदारी टपकती थी। कंधों तक बाल लटक रहे हैं। आप इधर से उधर टहल रहे हैं। एक छोटा-सा लड़का पान की तश्तरी लिए पीछे-पीछे लगा हुआ है। बात की काट-छाँट का क्या कहना है। जो बातें उनके मुँह से निकलती थीं, उनमें एक विलक्षण वक्रता रहती थी। उनकी बातचीत का ढंग उनके लेखों के ढंग से एकदम निराला होता था। नौकरों तक के साथ उनका संवाद सुनने लायक होता था।

(क) प्रस्तुत गद्यांश में किस की विशेषताओं का वर्णन किया गया है?   (1)

  1. भारतेंदु की
  2. राधेश्याम की
  3. रामचंद्र की
  4. बदरीनारायण की

(ख) चौधरी साहब एक खासे हिन्दुस्तानी रईस थे, खासे रईस से तात्पर्य है -     (1)

  1. दिखावा करने वाला
  2. उत्सव मनाने वाला
  3. गंभीर व्यक्तित्व वाला
  4. व्यंग्य करने वाला

(ग) चौधरी साहब की बातचीत के अंदाज़ से यह पता चलता है कि वे खासे हिंदुस्तानी रईस के साथ-साथ ______थे।   (1)

  1. साहित्य प्रेमी
  2. भाषानुरागी
  3. रसिक धर्मी
  4. सौन्दर्य प्रेमी

(घ) प्रस्तुत गद्यांश में 'विलक्षण वक्रता' से तात्पर्य स्पष्ट होता?    (1)

  1. मुहावरेदार
  2. कुटिलता
  3. वाक्‌ चातुर्य
  4. अनोखी वचन भंगिमा

(ङ) निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और सही विकल्प चुनकर लिखिए।    (1)

कथन - हर एक अदा से रियासत और तबीयतदारी टपकती थी।'

कारण - चौधरी साहब की गिनती धनी व्यक्तियों में होती थी। सहृदयता के लिए भी प्रसिद्ध थे।

  1. कथन (A) सही है और कारण (R) सही व्याख्या है।
  2. कथन (A) और कारण (R) दोनों ही गलत है।
  3. कथन (A) सही है किंतु कारण गलत है।
  4. कथन (A) सही है किंतु कारण (R) सही व्याख्या नहीं है।
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Chapter: [0.020099999999999996] रामचंद्र शुक्ल : प्रेमघन की छाया-स्मृति
Concept: प्रेमघन की छाया-स्मृति

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सही उत्तर वाले विकल्प चुनिए -

बालक के मुख पर विलक्षण रंगों का परिवर्तन हो रहा था, हृदय में कृत्रिम और स्वाभाविक भावों की लड़ाई की झलक आँखों में दीख रही थी। कुछ खाँसकर, गला साफ़ कर नकली परदे के हट जाने पर स्वयं विस्मित होकर बालक ने धीरे से कहा, ‘लड्डू’। पिता और अध्यापक निराश हो गए। इतने समय तक मेरा श्वास घुट रहा था। अब मैंने सुख से साँस भरी। उन सबने बालक की प्रवृत्तियों का गला घोंटने में कुछ उठा नहीं रखा था। पर बालक बच गया।उसके बचने की आशा है क्योंकि वह ‘लड्डू’ की पुकार जीवित वृक्ष के हरे पत्तों का मधुर मर्मर था, मरे काठ की अलमारी की सिर दुखाने वाली खड़खड़ाहट नहीं।

(1) ‘बच्चे के मुख पर रंग बदल रहे थे।’ इस पंक्ति के आधार पर आकलन करने से ज्ञात होता है कि बच्चे में उठ रहे भाव ______ के हैं। (1)

(क) सहृदयता
(ख) घबराहट
(ग) अंतरद्वंद्व
(घ) रोमांचकता

(2) गद्यांश के आधार पर कौन-सा वाक्य सही है? (1)

(क) काठ की अलमारी सदैव सिर दुखाती है।
(ख) शिक्षा प्रणाली पर व्यंग्य किया गया है।
(ग) बच्चों को पढ़ाना अत्यंत सहज कार्य है।
(घ) वृक्ष के हरे पतों का संगीत मधुर होता है।

(3) बालक द्वारा धीरे से लड्डू कहना दर्शाता है कि - (1)

(क) छोटी वस्तु भी पुरस्कार है।
(ख) कृत्रिमता का लबादा उतर गया।
(ग) कृत्रिमता का स्थायित्व संभव है।
(घ) लेखक का उद्देश्य पूरा हो गया।

(4) ‘अब मैंने सुख की साँस भरी’ के माध्यम से कह सकते हैं कि वह - (1)

(क) अत्यंत जागरूक नागरिक हैं।
(ख) बाल मनोविज्ञान से परिचित हैं।
(ग) स्तरानुसार शिक्षा के पक्षधर हैं।
(घ) अपने सुख की कामना करते हैं।

(5) गद्यांश हमें संदेश देता है कि - (1)

(क) स्वाभाविक विकास हेतु सहज एवं आनंदपूर्ण वातावरण होना चाहिए।
(ख) रटंत प्रणाली के कारण बच्चे की हृदय व्यथा चिंताजनक हो जाती है।(ग) बालक में निडरता थी तभी अपनी लड्डू की इच्छा को प्रकट कर पाया है।
(घ) अभिभावक एवं अध्यापकों को बालकों का चहुँमुखी विकास करना चाहिए।

(6) निम्नलिखित कथन कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए - (1)

कथन (A): लड़डू की पुकार जीवित वृक्ष के हरे पत्तों का मधुर मर्मर था।

कारण (R): बालक द्वारा लड्डू माँगा जाना वृक्ष के हरे पत्तों के समान इंगित करता है।

(क) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण कथन की सही व्याख्या करता है।
(ख) कथन (A) गलत है लेकिन कारण (R) सही है।
(ग) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत हैं।
(घ) कथन (A) सही है लेकिन कारण (R) उसकी गलत व्याख्या करता है।

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Chapter: [0.0202] पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी : सुमिरिनी के मनके
Concept: सुमिरिनी के मनके

घड़ीसाज़ी का इम्तहान पास करने से लेखक के अभिप्राय को स्पष्ट कीजिए।

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Chapter: [0.0202] पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी : सुमिरिनी के मनके
Concept: सुमिरिनी के मनके

निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए -

बालक के मुख पर विलक्षण रंगों का परिवर्तन हो रहा था, हृदय में कृत्रिम और स्वाभाविक भावों की लड़ाई की झलक आँखों में दिख रही थी। कुछ खाँसकर, गला साफ़ कर नकली परदे के हट जाने पर स्वयं विस्मित होकर बालक ने धीरे से कहा, 'लड्‌डू'। पिता और अध्यापक निराश हो गए। इतने समय तक मेरा श्वास घुट रहा था। अब मैंने सुख से साँस भरी। उन सबने बालक की प्रवृत्तियों का गला घोंटने में कुछ उठा नहीं रखा था। पर बालक बच गया। उसके बचने की आशा है क्योंकि वह 'लड्‌डू' की पुकार जीवित वृक्ष के हरे पत्तों पर मधुर मर्मर था, मरे काठ की अलमारी की सिर दुखाने वाली खड़खड़ाहट नहीं।
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Chapter: [0.0202] पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी : सुमिरिनी के मनके
Concept: सुमिरिनी के मनके

‘उसके पैर गाँव की ओर बढ़ ही नहीं रहे थे। इसी पगडंडी से बड़ी बहुरिया अपने मैके लौटा आवेगी गाँव छोड़कर चली जावेगी। फिर कभी नहीं आवेगी।’

लेखक संवदिया और बड़ी बहुरिया के माध्यम से समाज के एक बड़े वर्ग का वर्णन करत प्रतीत हो रहे हैं। इसे स्पष्ट करते हुए वर्तमान परिप्रेक्ष्य के साथ संबंध स्थापित कीजिए।

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Chapter: [0.0204] फणीश्वरनाथ 'रेणु' : संवदिया
Concept: संवदिया

'बड़ी बहुरिया का संवाद हरगोबिन सुना सकने में असमर्थ था' कथन के माध्यम से हरगोबिन की तत्कालीन स्थिति की विवेचना कीजिए।

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Chapter: [0.0204] फणीश्वरनाथ 'रेणु' : संवदिया
Concept: संवदिया

असगर वजाहत द्वारा लिखी लघुकथाओं में से कौन-सी लघुकथा आपको सर्वाधिक प्रभावित करती है और क्यों? स्पष्ट कीजिए।

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Chapter: [0.0206] असगर वजाहत : शेर, पहचान, चार हाथ, साझा
Concept: असगर वजाहत

शेर के मुँह में जानवरों का घुसना विसंगति को प्रतिपादित करता है। स्पष्ट कीजिए।

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Chapter: [0.0206] असगर वजाहत : शेर, पहचान, चार हाथ, साझा
Concept: शेर

'शेर' कहानी में उद्धृत व्यंग्य को स्पष्ट करते हुए लेखक के उद्देश्य का वर्णन कीजिए।

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Chapter: [0.0206] असगर वजाहत : शेर, पहचान, चार हाथ, साझा
Concept: शेर

निम्नलिखित पंक्ति का भाव-सौंदर्य लिखिए:

कभी-कभी किसी इलाके की संपदा ही उसका अभिशाप बन जाती है।

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Chapter: [0.0207] निर्मल वर्मा : जहाँ कोई वापसी नहीं
Concept: जहाँ कोई वापसी नहीं

‘जहाँ कोई वापसी नहीं’ पाठ के लिए कोई दूसरा शीर्षक लिखें तथा इसे चुनने के लिए अपने तर्क दें।

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Chapter: [0.0207] निर्मल वर्मा : जहाँ कोई वापसी नहीं
Concept: जहाँ कोई वापसी नहीं

औद्योगीकरण ने पर्यावरण को कैसे प्रभावित किया है? "जहाँ कोई वापसी नहीं" पाठ के आधार पर बताइए।

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Chapter: [0.0207] निर्मल वर्मा : जहाँ कोई वापसी नहीं
Concept: जहाँ कोई वापसी नहीं

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर सप्रसंग व्याख्या कीजिए।

विकास का यह ‘उजला’ पहलू अपने पीछे कितने व्यापक पैमाने पर विनाश का अंधेरा लेकर आया था, हम उसका छोटा-सा जायज़ा लेने दिल्‍ली में स्थित ‘लोकायन’ संस्था की ओर से सिंगरौली गए थे। सिंगरौली जाने से पहले मेरे मन में इस तरह का कोई सुखद भ्रम नहीं था कि औद्योगीकरण का चक्का, जो स्वतंत्रता के बाद चलाया गया, उसे रोका जा सकता है। शायद पैंतीस वर्ष पहले हम कोई दूसरा विकल्प चुन सकते थे, जिसमें मानव सुख की कसौटी भौतिक लिप्सा न होकर जीवन की जरूरतों द्वारा निर्धारित होती। पश्चिम जिस विकल्प को खो चुका था भारत में उसकी संभावनाएँ खुली थीं, क्योंकि अपनी समस्त कोशिशों के बावजूद अंग्रेजी राज हिंदुस्तान को संपूर्ण रूप से अपनी ‘सांस्कृतिक कॉलोनी’ बनाने में असफल रहा था।
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Chapter: [0.0207] निर्मल वर्मा : जहाँ कोई वापसी नहीं
Concept: जहाँ कोई वापसी नहीं

निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए -

मेरे लिए एक दूसरी दृष्टि से भी यह अनूठा अनुभव था। लोग अपने गाँवों से विस्थापित होकर कैसी अनाथ, उन्मूलित ज़िंदगी बिताते हैं, यह मैंने हिंदुस्तानी शहरों के बीच बसी मज़दूरों की गंदी, दम घुटती, भयावह बस्तियों और स्लम्स में कई बार देखा था, किंतु विस्थापन से पूर्व वे कैसे परिवेश में रहते होंगे, किस तरह की ज़िंदगी बिताते होंगे, इसका दृश्य अपने स्वच्छ, पवित्र खुलेपन में पहली बार अमझर गाँव में देखने को मिला।
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Chapter: [0.0207] निर्मल वर्मा : जहाँ कोई वापसी नहीं
Concept: जहाँ कोई वापसी नहीं

पारो और संभव में से आप किसके प्रति अधिक सहानुभूति रखते हैं और क्यों? ‘दूसरा देवदास’ पाठ के आधार पर उस पात्र की मन:स्थिति का वर्णन कीजिए।

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Chapter: [0.0209] ममता कालिया : दूसरा देवदास
Concept: दूसरा देवदास
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