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'भक्तिन' एक कर्मठ नारी के संघर्षमय जीवन की कहानी है। इस कथन को भक्तिन के जीवन के चार अध्यायों के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
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'अंतिम बार गोद में बेटी; तुमको ले न सका मैं हा एक फूल माँ के प्रसाद का तुझको दे न सका मैं हा!' |
- प्रस्तुत पंक्तियाँ किस कविता से ली गई हैं? यहाँ मैं शब्द का प्रयोग किसके लिए किया गया है? [1]
- 'बेटी ने किससे, क्या इच्छा जाहिर की? [2]
- क्या वक्ता की इच्छा पुरी हो सकी? कारण सहित उत्तर लिखिए। [2]
- इस कविता में कवि ने किस भेदभाव को उजागर किया हैं? वह किस प्रकार देश की प्रगति में बाधक है? समझाकर लिखिए। [5]
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सूरदास जी की भक्ति भावना पर प्रकाश डालते हुए संकलित पदों के आधार पर श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं तथा माता यशोदा के वात्सल्य भाव का वर्णन कीजिए।
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'जाग तुझको दूर जाना है' कविता में कवयित्री स्वयं के मन तथा मानव मन को क्या संदेश देना चाहती हैं? कविता की पंक्तियाँ कहीं-न-कहीं हम सब में एक नया उत्साह भरती हैं। कविता के आधार पर इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
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“बहुत है बहुत है दिवाकर!” कृतज्ञता-गद्गद स्वर में मैंने कहा, यह हो जाए दिवाकर, तो मेरा उद्घार हो जाएगा। तू नहीं जानता मैं कितना परेशान हूँ। घर में एक पल को चैन नहीं मिलता...। |
- वक्ता कौन है? उसका संक्षिप्त परिचय दीजिए। [1]
- दिवाकर कौन है? वह वक्ता को क्या काम दिलवा रहा था? [2]
- वक्ता की इस पर क्या प्रतिक्रिया थी? [2]
- “तू नहीं जानता मैं कितना परेशान हूँ। घर में एक पल को चैन नहीं मिलता......।" इस कथन के आलोक में वक्ता के घर की स्थिति का वर्णन कीजिए। [5]
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राजेन्द्र यादव ने समकालीन संदर्भों एवं समस्याओं का मंथन करते हुए 'सारा आकाश' उपन्यास की रचना की है। समर एक ऐसा पात्र है जिसका चरित्रांकन यथार्थवाद के धरातल पर किया गया है। उक्त कथन को ध्यान सें रखकर समर का चरित्र चित्रण कीजिए।
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'सारा आकाश' केवल समर और प्रभा की ही कथा नहीं है बल्कि इसके माध्यम से लेखक ने पारिवारिक तथा सामाजिक समस्याओं को भी उजागर किया है। उपन्यास के आधार पर इस कथन की व्याख्या कीजिए। साथ ही यह भी लिखिए कि आप इस कथन से कितना सहमत हैं और क्यों?
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“उनके प्रसंग में मेरी बात कहीं नहीं आती। मैं अनेकानेक साधारण व्यक्तियों में से हूँ। वे असाधारण हैं। उन्हें जीवन में असाधारण का ही साथ चाहिए था। सुना है राज-दुहिता बहुत विदुषी हैं।”
- प्रस्तुत कथन के वक्ता और श्रोता कौन हैं? [1]
- उक्त कथन का संदर्भ स्पष्ट कीजिए। [2]
- “वक्ता ने असाधारण' किसे कहा और क्यों? [2]
- उक्त संवाद के आलोक में वक्ता के चारित्र की विशेषताएँ लिखिए। [5]
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“राज्याश्रय में रहकर साहित्यकार का लेखन कुंठित हो जाता है -'आषाढ़ का एक दिन' नाटक के आधार पर इस कथन की समीक्षा कीजिए।
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'कालिदास जहाँ एक तरफ अप्रतिम प्रतिभा के स्वामी हैं, तो वहीं दूसरी तरफ उनके स्वभाव में दुर्बलताओं को भी देखा गया है।` - इस कथन को ध्यान में रखते हुए कालिदास का चरित्र-चित्रण कीजिए।
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