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बच्चे की दंतुरित मुसकान का कवि के मन पर क्या प्रभाव पड़ता है? - Hindi Course - A

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प्रश्न

बच्चे की दंतुरित मुसकान का कवि के मन पर क्या प्रभाव पड़ता है?

एका वाक्यात उत्तर

उत्तर

बच्चे की दंतुरित मुसकान का कवि के मन पर अत्यंत गहरा प्रभाव पड़ता है। कवि को बच्चे की मुसकान बहुत मनमोहक लगती है जो मृत शरीर में भी प्राण डाल देती है।

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यह दंतुरित मुसकान
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पाठ 6: नागार्जुन - यह दंतुरहित मुस्कान और फसल - यह दंतुरित मुसकान [पृष्ठ ४१]

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एनसीईआरटी Hindi - Kshitij Part 2 Class 10
पाठ 6 नागार्जुन - यह दंतुरहित मुस्कान और फसल
यह दंतुरित मुसकान | Q 1 | पृष्ठ ४१

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भाव स्पष्ट कीजिए -

छोड़कर तालाब मेरी झोंपड़ी में खिल रहे जलजात।


भाव स्पष्ट कीजिए -

छू गया तुमसे कि झरने लग पड़े शेफालिका के फूल बाँस था कि बबूल?


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“धूलि-धूसर तुम्हारे ये गात........
छोड़कर तालाब मेरी झोपड़ी में खिल रहे जलजात”

'तुम्हारी ये दंतुरित मुस्कान' से ली गई उपर्युक्त पंक्तियों में प्रयुक्त बिम्ब को स्पष्ट कीजिए।


'दंतुरित मुस्कान' कविता में कवि को शिशु का धूल-धूसरित शरीर प्रतीत होता है?


पद्य पाठ के आधार पर निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखिए -

बच्चे की दंतुरित मुस्कान का किस-किस पर क्या-क्या प्रभाव पड़ता है? यह 'दंतुरित मुस्कान' कविता के आधार पर लिखिए।


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