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भाव स्पष्ट कीजिए−जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाँहि। - Hindi Course - B

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प्रश्न

भाव स्पष्ट कीजिए
जब मैं था तब हरि नहींअब हरि हैं मैं नाँहि।

टीपा लिहा

उत्तर

इस पंक्ति द्वारा कवि का कहना है कि जब तक मनुष्य में अज्ञान रुपी अंधकार छाया है वह ईश्वर को नहीं पा सकता। अर्थात अहंकार और ईश्वर का साथ-साथ रहना नामुमकिन है। यह भावना दूर होते ही वह ईश्वर को पा लेता है।

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साखी
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पाठ 1.1: साखी - प्रश्न-अभ्यास (ख) [पृष्ठ ६]

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एनसीईआरटी Hindi - Sparsh Part 2 Class 10
पाठ 1.1 साखी
प्रश्न-अभ्यास (ख) | Q 3 | पृष्ठ ६

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भाव स्पष्ट कीजिए
पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुवापंडित भया न कोइ।


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उदाहरण − जिवै - जीना
औरन, माँहि, देख्या, भुवंगम, नेड़ा, आँगणि, साबण, मुवा, पीव, जालौं, तास।


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