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महाराष्ट्र राज्य शिक्षण मंडळएचएससी वाणिज्य (इंग्रजी माध्यम) इयत्ता १२ वी

‘चादर देखकर पैर फैलाना बुद्‌धिमानी कहलाती है’, इस विषय पर अपने विचार व्यक्त कीजिए । - Hindi

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प्रश्न

‘चादर देखकर पैर फैलाना बुद्‌धिमानी कहलाती है’, इस विषय पर अपने विचार व्यक्त कीजिए ।

टीपा लिहा

उत्तर

चादर देखकर पैर फैलाने का अर्थ है, जितनी अपनी क्षमता हो उतने में ही काम चलाना। यह अर्थशास्त्र का साधारण नियम है। सामान्य व्यक्तियों से लेकर बड़ी-बड़ी कंपनियाँ भी इस नियम का पालन करती हैं। जो लोग इस नियम के आधार पर अपना कार्य करते हैं, उनके काम सुचारु रूप से चलते हैं। जो लोग बिना सोचे-विचारे किसी काम की शुरुआत कर देते हैं और अपनी क्षमता का ध्यान नहीं रखते, उनके सामने आगे चलकर आर्थिक संकट उपस्थित हो जाता है। इसके कारण काम ठप हो जाता है। इसलिए समझदारी इसी में है कि अपनी क्षमता का अंदाज लगाकर ही कोई कार्य शुरू किया जाए। इससे कार्य आसानी से पूरा हो जाता है। चादर देखकर पैर फैलाने में ही बुद्धिमानी होती है।

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वृंद के दोहे
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पाठ 5.2: वृंद के दोहे - स्वाध्याय [पृष्ठ २९]

APPEARS IN

बालभारती Hindi - Yuvakbharati 12 Standard HSC Maharashtra State Board
पाठ 5.2 वृंद के दोहे
स्वाध्याय | Q ३. (अ) | पृष्ठ २९

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दोहा छंद की विशेषताएँ बताइए।


निम्नलिखित पठित काव्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

सरसुति के भंडार की, बड़ी अपूरब बात।
ज्यौं खरचै त्यौं-त्यौं बढ़ै, बिन खरचे घटि जात।।

नैना देत बताय सब, हिय को हेत-अहेत।
जैसे निरमल आरसी, भली बुरी कहि देत।।

अपनी पहुँच बिचारि कै, करतब करिए दौर।
तेते पाँव पसारिए, जेती लाँबी सौर।।

फेर न ह्‌वै हैं कपट सों, जो कीजै ब्यौपार।
जैसे हाँड़ी काठ की, चढ़ै न दूजी बार।।

ऊँचे बैठे ना लहैं, गुन बिन बड़पन कोइ।
बैठो देवल सिखर पर, वायस गरुड़ न होइ।।

उद्यम कबहुँ न छाँड़िए, पर आसा के मोद।
गागरि कैसे फोरिए, उनयो देखि पयोद।।

1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए:  (2)

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  4. दूसरे की आशा के भरोसे कया बंद नहीं करना चाहिए?

2. निम्नलिखित शब्दों के लिंग पहचानकर लिखिए:   (2)

  1. सौर - ______
  2. नैना - ______
  3. पाँव - ______
  4. काठ - ______

3. चादर देखकर पैर फैलाना बुद्धिमानी कहलाती हैं। इस विचार पर अपना मत 40 से 50 शब्दों में व्यक्त कीजिए:   (2)


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