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प्रश्न
दोहा छंद की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर
दोहा अद्र्धसम मात्रिक छंद है। इसके चार चरण होते हैं। दोहे के प्रथम और तृतीय (विषम) चरण में १३ - १३ मात्राएँ होती हैं तथा द्वितीय और चतुर्थ (सम) चरणों में ११ - ११ मात्राएँ होती हैं। दोहे के प्रत्येक चरण के अंत में लघु वर्ण आता है।
जैसे –
`\underset{(१) १३ "मात्रा"){"सरसुति के भंडार की,"} \underset{(२) ११ "मात्रा"){ "बड़ी अपूरब बात।"}`
`\underset{(३) १३ "मात्रा"){"ज्यौं खरचै त्यौं-त्यौं बढ़ै,"} \underset{(४) ११ "मात्रा"){ "बिन खरचे घटि जात।"}`
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सरसुति के भंडार की, बड़ी अपूरब बात। नैना देत बताय सब, हिय को हेत-अहेत। अपनी पहुँच बिचारि कै, करतब करिए दौर। फेर न ह्वै हैं कपट सों, जो कीजै ब्यौपार। ऊँचे बैठे ना लहैं, गुन बिन बड़पन कोइ। उद्यम कबहुँ न छाँड़िए, पर आसा के मोद। |
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