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प्रश्न
सहसंबंध जोड़िए:-
उत्तर
(१) बैठो देवल सिखर पर, वायस गरुड़ न होइ।
(२) काग निबौरी लेत
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कारण लिखिए:
सरस्वती के भंडार को अपूर्व कहा गया है:-
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व्यापार में दूसरी बार छल-कपट करना असंभव होता है :-
‘चादर देखकर पैर फैलाना बुद्धिमानी कहलाती है’, इस विषय पर अपने विचार व्यक्त कीजिए ।
'ज्ञान की पूँजी बनाना चाहिए', इस विषय पर अपने विचार लिखिए।
जीवन के अनुभवों और वास्तविकता से परिचित कराने वाले वृंद जी के दोहों का रसास्वादन कीजिए।
निम्नलिखित प्रश्न का केवल एक वाक्य में उत्तर लिखिए:
वृंद जी की प्रमुख रचनाएँ लिखिए।
दोहा छंद की विशेषताएँ बताइए।
निम्नलिखित पठित काव्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
सरसुति के भंडार की, बड़ी अपूरब बात। नैना देत बताय सब, हिय को हेत-अहेत। अपनी पहुँच बिचारि कै, करतब करिए दौर। फेर न ह्वै हैं कपट सों, जो कीजै ब्यौपार। ऊँचे बैठे ना लहैं, गुन बिन बड़पन कोइ। उद्यम कबहुँ न छाँड़िए, पर आसा के मोद। |
1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए: (2)
- उपर्युक्त पद्यांश में आँखों कीं तुलना किससे की गई ?
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- दूसरे की आशा के भरोसे कया बंद नहीं करना चाहिए?
2. निम्नलिखित शब्दों के लिंग पहचानकर लिखिए: (2)
- सौर - ______
- नैना - ______
- पाँव - ______
- काठ - ______
3. चादर देखकर पैर फैलाना बुद्धिमानी कहलाती हैं। इस विचार पर अपना मत 40 से 50 शब्दों में व्यक्त कीजिए: (2)