Advertisements
Advertisements
प्रश्न
घर में अतिथि के आगमन पर आपको कैसा लगता है, बताइए।
उत्तर
हमारे देश में अतिथियों को देवता माना गया है। जिस प्रकार से हम देवताओं का आदर करते हैं, उसी प्रकार अतिथियों का भी हमें आदर सम्मान करना चाहिए। अतिथि का अर्थ ही होता है, जिसके आने-जाने का समय तथा दिन निर्धारित न हो। यदि सुबह का समय होगा तो चाय-नाश्ता करवाएँगे, दोपहर के समय उसे प्रीतिभोज व रात्रि मैं मेहमान आए तो रात्रिभोज करवाना हमारा कर्तव्य बनता है। आपके घर पहुँचने वाला अतिथि कभी असमय भी पहुँच सकता है। ऐसे समय लोग भीतर ही भीतर कुढ़ते हैं। यह ठीक नहीं है। असमय आनेवाले अतिथि को भी हमें वही सम्मान देना चाहिए, जो सम्मान हम समय से आनेवाले अतिथि को देते है।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
पानी, वाणी, दूध इन शब्दों का उपयोग करते हुए कोई कविता लिखो।
निम्न मुद्दों के आधार पर विज्ञापन लिखो :
स्थल/जगह, संपर्क, पुस्तक मेला, दिनांक, समय
शब्दों की अंत्याक्षरी खेलोः
जैसे - श्रृंखला ..... लालित्य ..... यकृत ..... तरुवर ..... रम्य .....।
किसी शहीद और उसके परिवार के बारे में सुनो: मुद्दे - जन्म तिथि, गाँव, शिक्षा, घटना।
चित्र पहचानकर उनके नाम लिखो:
____________
।। जननी-जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी ।।
।। करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान ।।
सद्गुणों को आत्मसात करने के लिए क्या करोगे, इसपर आपस में चर्चा करो।
निम्नलिखित विषय पर लगभग 120 शब्दों में लघुकथा लिखिए।
खेतों में भुट्टे की फसल देख, हर कोई कहता- कितनी बढ़िया है। दो-चार दिन में कटाई की तैयारी थी लेकिन .......
निम्नलिखित विषय पर 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए -
समाज में बढती आर्थिक असमानताएँ