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प्रश्न
हैलोऐरीन, हैलोऐल्केन और हैलोऐल्कीन से कम क्रियाशील होती हैं। समीक्षा कीजिए।
उत्तर
हैलोऐरीन में हैलोजन परमाणु पर उपस्थित एकाकी इलेक्ट्रॉन युगल वलय के π-इलेक्ट्रॉनों के साथ संयुग्मन में होते हैं।
अनुनाद के कारण C-Cl आबंध में आंशिक द्विबंध के गुण आ जाते हैं। जिसके परिणामस्वरूप हैलोऐल्केन की तुलना में हैलोऐरीन में आबंध विदलन अपेक्षाकृत कठिन होता है। अत: ये नाभिकरागी प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं के प्रति कम क्रियाशील होती हैं।
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संबंधित प्रश्न
निम्न यौगिकों में से कौन-सा OH− आयन द्वारा नाभिकरागी प्रतिस्थापन से रेसिमिक मिश्रण देगा।
(a) \[\begin{array}{cc}
\phantom{}\ce{CH3 - CH - Br}\\
\phantom{}|\\
\phantom{....}\ce{C2H5}\phantom{}
\end{array}\]
(b) \[\begin{array}{cc}
\phantom{..}\ce{Br}\\
\phantom{}|\\
\phantom{}\ce{CH3 - C - CH3}\\
\phantom{}|\\
\phantom{....}\ce{C2H5}\phantom{}
\end{array}\]
(c) \[\begin{array}{cc}
\ce{CH3 - CH - CH2Br}\\
|\phantom{.....}\\
\ce{C2H5}\phantom{..}
\end{array}\]
निम्नलिखित यौगिकों को नाभिकरागी प्रतिस्थापन अभिक्रिया में अभिक्रिया दर के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए।
(a) | ![]() |
(b) | ![]() |
(c) | ![]() |
निम्नलिखित यौगिकों को नाभिकरागी प्रतिस्थापन अभिक्रिया में अभिक्रिया दर के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए।
(a) | ![]() |
(b) | ![]() |
(c) | ![]() |
अभिक्रिया माध्यमिक के लिए निम्नलिखित में से कोन-से कथन सही हैं?
(i) माध्यमिक (c) अस्थायी है क्योंकि इसमें कार्बन पाँच परमाणुओं से जुड़ा है।
(ii) माध्यमिक (c) अस्थायी है क्योंकि इसमें कार्बन परमाणु sp2 संकरित है।
(iii) माध्यमिक (c) स्थायी है क्योंकि इसमें कार्बन परमाणु sp2 संकरित है।
(iv) माध्यमिक (c) अभिक्रियक (b) से कम स्थायी है।
इस अभिक्रिया की गतिकी के लिए कौन-से कथन सही हैं?
(i) अभिक्रिया की दर केवल (b) की सांद्रता पर निर्भर करती है।
(ii) अभिक्रिया की दर (a) और (b) दोनों की सांद्रता पर निर्भर करती है।
(iii) अभिक्रिया की आण्विकता एक है।
(iv) अभिक्रिया की आण्विकता दो है।
निम्नलिखित संरचना से संबंधित अन्य अनुनाद संरचनाएँ लिखिए और ज्ञात कीजिए कि अणु में उपस्थित प्रकार्यात्मक समूह ऑर्थो-पैरा निदर्शन वाला है या मेटा निदर्शन वाला।
निम्नलिखित यौगिकों में से किसकी SN1 अभिक्रिया द्रुतगामी होगी और क्यों?
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(क) | (ख) |
ऐलिल क्लोराइड n-प्रोपिल क्लोराइड की अपेक्षा अधिक आसानी से क्यों जलअपघटित होता है?
ग्रीन्यार अभिकर्मक के उपयोग में लेशमात्र नमी भी न होना क्यों आवश्यक है?
ऐरिल हैलाइड नाभिकरागी प्रतिस्थापन के प्रति अत्यंत कम क्रियाशील होते हैं। निम्नलिखित यौगिकों की नाभिकरागी प्रतिस्थापन के प्रति अभिक्रियाशीलता का क्रम लिखिए और विवेचना कीजिए।
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(I) | (II) | (III) |
हैलोएरीनों के C−X आबंध की प्रकृति की विवेचना कीजिए।
सायनाइड आयन उभदंती नाभिकरागी के समान क्रिया करता है। जलीय माध्यम में यह किस छोर से प्रबल नाभिकरागी का कार्य करता है? अपने उत्तर का कारण दीजिए।
कॉलम I और कॉलम II के मदों को सुमेलित कीजिए।
कॉलम I | कॉलम II |
(i) SN1 अभिक्रिया | (a) विस-डाइब्रोमाइड |
(ii) अग्निशामक में रसायन | (b) जेम-डाइहैलाइड |
(iii) ऐल्कीनों का ब्रोमीनन | (c) रेसिमीकरण |
(iv) ऐल्किलिडीन हैलाइड | (d) सेत्जेफ नियम |
(v) ऐल्किल हैलाइड से HX का निकलना | (e) क्लोरोब्रोमोकार्बन |
अभिकथन - KCN मेथिल क्लोराइड से अभिक्रिया करके मेथिल आइसोसायनाइड देता है।
तर्क - CN− एक उभदंती नाभिकरागी है।
अभिकथन - क्लोरोएथेन की अपेक्षा क्लोरोबेन्जीन की क्लोरीन को −OH द्वारा प्रतिस्थापित करना कठिन है।
तर्क - अनुनाद के कारण क्लोरोबेन्जीन के C−Cl आबंध में आंशिक द्विआबंध गुण आ जाता है।
क्षारों के साथ कुछ ऐल्किलहैलाइड प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ देते हैं जबकि कुछ निराकरण अभिक्रियाएँ। उदाहरणों की सहायता से ऐल्किल हैलाइडों के उन संरचनात्मक गुणों की विवेचना कीजिए जो इस अंतर का कारण हैं।