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महाराष्ट्र राज्य शिक्षण मंडळएस.एस.सी (इंग्रजी माध्यम) इयत्ता १० वी

हमने अपने जीवन मे बाबू जी के रहते अभाव नहीं देखा। उनके न रहने के बाद जो कुछ मुझपर बीता, वह एक दूसरी तरह का अभाव था कि मुझे बैंक की नौकरीं करनी पड़ी। - Hindi (Second/Third Language) [हिंदी (दूसरी/तीसरी भाषा)]

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प्रश्न

निम्नलिखित पठित गदयांश पढ़कर दी गईं सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

हमने अपने जीवन मे बाबू जी के रहते अभाव नहीं देखा। उनके न रहने के बाद जो कुछ मुझपर बीता, वह एक दूसरी तरह का अभाव था कि मुझे बैंक की नौकरीं करनी पड़ी। लेकिन उससे पूर्व बाबू जी के रहते मैं जब जन्मा था तब वे उत्तर प्रदेश में पुलिस मंत्री थे। उस समय गृहमंत्री को पुलिस मंत्री कहा जाता था। इसलिए मैं हमेशा कल्पना किया करता था कि हमारे पास ये छोटी गाड़ी नहीं, बड़ी आलीशान गाड़ी होनी चाहिए। बाबू जी प्रधानमंत्री हुए तो वहाँ जो गाड़ी थी वह थी, इंपाला शेवरलेट। उसे देख-देख, बड़ा जी करता कि मौका मिले और उसे चलाऊँ। प्रधानमंत्री का लड़का था। कोई मामूली बात नहीं थी। सोचते-विचारते, कल्पना की उड़ान भरते एक दिन मौका मिल गया। धीरे-धीरे हिम्मत भी खुल गई थी ऑर्डर देने की। हमने बाबू जी के निजी सचिव से कहा- "सहाय साहब, जरा ड्राइवर से कहिए, इंपाला लेकर रेजिडेंस की तरफ आ जाएँ।"

दो मिनट में गाड़ी आकर दरवाजे पर लग गई। अनिल भैया ने कहा- "मैं तो इसे चलाऊँगा नहीं। तुम्हीं चलाओ।"

मैं आगे बढ़ा। ड्राइवर से चाबी माँगी। बोला- "तुम बैठो, आराम करो, हम लोग वापस आते हैं अभी।"

  1. कृति पूर्ण कीजिए:     [2]
    1.  
  2. उत्तर लिखिए:     [2]
    1. लेखक यह कल्पना किया करते थे - ...............
    2. लेखक के जन्म के समय बाबू जी उत्तर प्रदेश में - ...............

    1. गद्यांश में उल्लेखित विलोम शब्द की जोड़ी ढूँढ़कर लिखिए:     [1]
      ............ × ...........
    2. गद्यांश में उल्लेखित शब्दयुग्म दूँढ़कर लिखिए:    [1]
      1. .............
      2. .............
  3. 'सादा जीवन, उच्च विचार' इस विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए।     [2]
आकलन

उत्तर

  1. 1
    1. उनके पास छोटी गाड़ी नहीं, बल्कि बड़ी आलीशान गाड़ी होनी चाहिए।
    2. गृहमंत्री।

    1. अभाव × प्रभाव
      1. बैलगाड़ी - गाड़ी
      2. सहाय - साहब
  2. सादा जीवन, उच्च विचार एक महान जीवन दर्शन है। इसका अर्थ है कि हमें सरलता से जीवन जीना चाहिए लेकिन हमारे विचार ऊँचे और नैतिक होने चाहिए। हमें दिखावे से बचना चाहिए और सच्चाई, ईमानदारी तथा परोपकार के मार्ग पर चलना चाहिए। सादगी से जीवन जीकर हम समाज के लिए प्रेरणा बन सकते हैं। 
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