Advertisements
Advertisements
प्रश्न
"जब भी एक ऑक्सीकारक तथा अपचायक के बीच अभिक्रिया संपन्न की जाती है, तब अपचायक के आधिक्य में निम्नतर ऑक्सीकरण अवस्था का यौगिक तथा ऑक्सीकारक के आधिक्य में उच्चतर ऑक्सीकरण अवस्था का यौगिक बनता है।" इस वक्तव्य का औचित्य तीन उदाहरण देकर दीजिए।
उत्तर
दिये गये वक्तव्य का औचित्य निम्नलिखित उदाहरणों द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है-
(क)
\[\ce{\underset{Excess}{\underset{(reducing agent)}{2C(s)}} + \underset{(oxidising agent)}{O2(g)} -> 2\underset{lower O.S.}{\underset{compound of}{\overset{+2}{CO}(g)}}}\] ...........(i)
\[\ce{\underset{(reducing agent)}{C(s)} + \underset{(oxidising agent) Excess}{O2(g)} -> \underset{compound of higher O.S.}{CO2^{+4}(g)}}\] ..........(ii)
अभिक्रिया (i) में अपचायक (reducing agent) कार्बन अधिकता में है, जबकि अभिक्रिया (ii) में ऑक्सीकारक (oxidising agent) O2 अधिकता में है। अभिक्रिया (i) में CO (कार्बन की O.S. = +2) तथा अभिक्रिया (ii) में CO2 (कार्बन की O.S. = +4) का निर्माण होता है।
(ख)
\[\ce{\underset{Excess}{\underset{(reducing agent)}{4Na(s)}} + \underset{(oxidising agent)}{O2(g)} -> \underset{lower O.S.}{\underset{compound of}{Na2\overset{-2}{O}(g)}}}\] ..........(i)
\[\ce{\underset{(reducing agent)}{2Na(s)} + \underset{(oxidising agent) Excess}{2O2} -> \underset{compound of higher O.S.}{\overset{-1}{Na2O2}}}\] ...........(ii)
(ग)
\[\ce{\underset{Excess}{\underset{(reducing agent)}{P4(s)}} + \underset{(oxidising agent)}{6Cl2(g)} -> \underset{lower O.S.}{\underset{compound of}{4P\overset{+3}{Cl3}(l)}}}\]
\[\ce{\underset{(reducing agent)}{P4(s)} + \underset{(oxidising agent) Excess}{10Cl2(g)} -> \underset{compound of higher O.S.}{4P\overset{+5}{Cl5}(s)}}\]
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
निम्नलिखित यौगिक के सूत्र लिखिए-
निकल (II) सल्फेट
निम्नलिखित यौगिक के सूत्र लिखिए-
थेलियम (I) सल्फेट
निम्नलिखित यौगिक के सूत्र लिखिए-
आयरन (III) सल्फेट
अपनी अभिक्रियाओं में सल्फर डाइऑक्साइड तथा हाइड्रोजन परॉक्साइड ऑक्सीकारक तथा अपचायक दोनों ही रूपों में क्रिया करते हैं, जबकि ओजोन तथा नाइट्रिक अम्ल केवल ऑक्सीकारक के रूप में ही। क्यों?
इस अभिक्रिया को देखिए-
\[\ce{O3(g) + H2O2(l) -> H2O(l) + 2O2(g)}\]
बताइए कि इसे निम्नलिखित ढंग से लिखना ज्यादा उचित क्यों है?
\[\ce{O3(g) + H2O2(l) -> H2O(l) + O2(g) + O2(g)}\]
उपर्युक्त अपचयोपचय अभिक्रिया के अन्वेषण की विधि सुझाइए।
इस प्रेक्षण की अनुकूलता को कैसे समझाएँगे?
क्लोराइडयुक्त अकार्बनिक यौगिक में सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल डालने पर हमें तीक्ष्ण गंध वाली HCI गैस प्राप्त होती है, परंतु यदि मिश्रण में ब्रोमाइड उपस्थित हो, तो हमें ब्रोमीन की लाल वाष्प प्राप्त होती है, क्यों?
निम्नलिखित अभिक्रिया क्यों होती है?
\[\ce{XeO^{4-}_6(aq) + 2F^-(aq) + 6H^+(aq) -> XeO3(g) + F2(g) + 3H2O(l)}\]
यौगिक Na4XeO6 (जिसका एक भाग \[\ce{XeO^{4-}_6}\] है) के बारे में आप इस अभिक्रिया में क्या निष्कर्ष निकाल सकते हैं?
निम्नलिखित अभिक्रियाओं में-
(क) \[\ce{H3PO2(aq) + 4AgNO3(aq) + 2H2O(l) -> H3PO4(aq) + 4Ag(s) +4HNO3(aq) }\]
(ख) \[\ce{H3PO2(aq) + 2CuSO4(aq) + 2H2O(l) -> H3PO4(aq) + 2Cu(s) + 2H2SO4(aq)}\]
(ग) \[\ce{C6H5CHO(l) + 2[Ag(NH3)2)]^+ (aq) + 3OH^-(aq) -> C6H5COO^-(aq) + 2Ag(s) + 4NH3(aq) + 2H2O(l)}\]
(घ) \[\ce{C6H5CHO(l) + 2Cu^2+(aq) + 5OH^-(aq)}\] कोई परिवर्तन नहीं।
इन अभिक्रियाओं से Ag+ तथा Cu2+ के व्यवहार के विषय में निष्कर्ष निकालिए।
आयन-इलेक्ट्रॉन विधि द्वारा निम्नलिखित रेडॉक्स अभिक्रियाओं को संतुलित कीजिए-
\[\ce{MnO^-_4(aq) + I^-(aq) -> MnO2(s) + I2(s)}\] (क्षारीय माध्यम)
आयन-इलेक्ट्रॉन विधि द्वारा निम्नलिखित रेडॉक्स अभिक्रिया को संतुलित कीजिए-
\[\ce{MnO^-_4(aq) +SO2(g) -> Mn^2+(aq) + HSO^-_4(aq)}\] (अम्लीय माध्यम)