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प्रश्न
कोई रेलगाड़ी बिना ढाल वाले 30 m त्रिज्या के वृत्तीय मोड़ पर 54 kmh-1 की चाल से चलती है। रेलगाड़ी की संहति 106 kg है। इस कार्य को करने के लिए आवश्यक अभिकेंद्र बल कौन प्रदान करता है, इंजन अथवा पटरियाँ ? पटरियों को क्षतिग्रस्त होने से बचाने के लिए मोड़ का ढाल-कोण कितना होना चाहिए?
उत्तर
आवश्यक अभिकेंद्र बल पटरियाँ प्रदान करती हैं।
यहाँ ν = 54 km h-1 = `54 xx 5/18` = 15 m s -1, g = 10 m s-2
वृत्तीय मोड़ की त्रिज्या R = 30 m, m = 106 kg
पटरियों को क्षतिग्रस्त होने से बचाने के लिए ढाल - कोण इतना होना चाहिए की रेलगाड़ी को मोड़ पार करने हेतु घर्षण की आवश्यकता न पड़े।
इसके लिए `"ν"^2 = "R" "g" "tan" theta`
∴ `"tan" theta = "ν"^2/("R" "g")`
= `(15 xx 15)/(30 xx 10) = 3/4`
∴ `theta = "tan"^-1 (3/4)`
= 40°
अतः पटरियों को क्षतिग्रस्त होने से बचाने के लिए पटरियों का ढाल-कोण 40° रखना चाहिए।
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