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निम्नलिखित प्रश्न का भाव स्पष्ट कीजिए −चलो अभीष्ट मार्ग में सहर्ष खेलते हुए,विपत्ति, विघ्न जो पड़ें उन्हें ढकेलते हुए।घटे न हेलमेल हाँ, बढ़े न भिन्नता कभी,अतर्क एक पंथ के सतर्क पंथ हों सभी। - Hindi Course - B

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प्रश्न

निम्नलिखित प्रश्न का भाव स्पष्ट कीजिए −
चलो अभीष्ट मार्ग में सहर्ष खेलते हुए,
विपत्तिविघ्न जो पड़ें उन्हें ढकेलते हुए।
घटे न हेलमेल हाँबढ़े न भिन्नता कभी,
अतर्क एक पंथ के सतर्क पंथ हों सभी।

टीपा लिहा

उत्तर

कवि संदेश देता है कि हमें निरंतर अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना चाहिए। बाधाओंकठिनाइयों को हँसते हुएढकेलते हुए बढ़ना चाहिए लेकिन आपसी मेलजोल कम नहीं करना चाहिए। किसी को अलग न समझेंसभी पंथ व संप्रदाय मिलकर सभी का हित करने की बात करेविश्व एकता के विचार को बनाए रखे।

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मनुष्यता
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 1.4: मनुष्यता - प्रश्न-अभ्यास (ख) [पृष्ठ २२]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi - Sparsh Part 2 Class 10
पाठ 1.4 मनुष्यता
प्रश्न-अभ्यास (ख) | Q 3 | पृष्ठ २२

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निम्नलिखित प्रश्न का भाव स्पष्ट कीजिए −
रहो न भूल के कभी मदांध तुच्छ वित्त में,
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निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए -

'मनुष्यता' कविता में भाग्यहीन किसे और क्यों कहा गया है? अपने शब्दों में लिखिए।


निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के लिए सही विकल्प चुनकर लिखिए:

विचार लो कि मर्त्य हो न मृत्यु से डरो कभी,
मरो, परंतु यों मरो कि याद जो करें सभी।
हुई न यों सुमृत्यु तो वृथा मरे, वृथा जिए,
मरा नहीं वही कि जो जिया न आपके लिए।
वहीं पशु प्रवत्ति है कि आप आप ही चरे,
वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे।।
  1. कवि ने ऐसा क्यों कहा कि मृत्यु से नहीं डरना चाहिए?   [1]
    1. मृत्यु से यश प्राप्त होता है
    2. जन्म - मरण ईश्वर के हाथ में है
    3. मृत्यु के बाद नया शरीर मिलता है
    4. मृत्यु तो अवश्यंभावी है
  2. कवि कैसी मृत्यु को सुमृत्यु कहता है?    [1]
    1. बिना किसी पीड़ा के हुई मृत्यु
    2. अपनों के हित प्राप्त होनेवाली मृत्यु
    3. महान उद्देश्य के लिए मरनेवाले की मृत्यु
    4. स्वार्थ सिद्ध करते समय हुई मृत्यु
  3. कैसी मृत्यु व्यर्थ है?    [1]
    1. देश हित प्राप्त होने वाली मृत्यु
    2. जिस मृत्यु को याद न किया जाए
    3. दूसरों के लिए संघर्ष करते हुए प्राप्त मृत्यु
    4. मृत्यु के बाद हमेशा याद रहे
  4. पशु प्रवृत्ति क्या है?    [1]
    1. अपने लिए जीना - खाना
    2. दूसरों के लिए जीना - खाना
    3. परोपकार का भाव रखना
    4. दूसरों की भावनाओं को ठेस पहुँचाना
  5. कौन/सा से वाक्य पद्यांश से मेल खाता है/खाते हैं?    [1]
    1. उदार मनुष्य दूसरों के लिए जीता - मरता है।
    2. पशु प्रवृत्ति को समझ के साथ अपनाना चाहिए।
    3. मनुष्य जीवन की सार्थकता पररोपकार में है।
    4. जीवन में कुछ पाने के लिए स्वार्थी होना पड़ता है।
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      1. केवल I
      2. II, IV
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      4. II, III

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