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निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए - 'मनुष्यता' कविता में भाग्यहीन किसे और क्यों कहा गया है? अपने शब्दों में लिखिए। - Hindi Course - B

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प्रश्न

निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए -

'मनुष्यता' कविता में भाग्यहीन किसे और क्यों कहा गया है? अपने शब्दों में लिखिए।

टीपा लिहा

उत्तर

'मनुष्यता' कविता में मैथिलीशरण गुप्त ने भाग्यहीन व्यक्ति को उसे माना है जो धैर्यवान नहीं है। यानी वह व्यक्ति जिसमें धीरज धारण करने की क्षमता नहीं है, भाग्यहीन है। वह व्यक्ति बिल्कुल भाग्यहीन है, जो धैर्य धारण की क्षमता नहीं रखता। जिसके आचरण में सैदव अधीरता रहती है, वह व्यक्ति भाग्यहीन है। सच्चा मनुष्य वही है जो किसी मनुष्य के काम आए।

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मनुष्यता
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
2022-2023 (March) Outside Delhi Set 3

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निम्नलिखित प्रश्न का भाव स्पष्ट कीजिए −
चलो अभीष्ट मार्ग में सहर्ष खेलते हुए,
विपत्तिविघ्न जो पड़ें उन्हें ढकेलते हुए।
घटे न हेलमेल हाँबढ़े न भिन्नता कभी,
अतर्क एक पंथ के सतर्क पंथ हों सभी।


अपने अध्यापक की सहायता से रंतिदेव, दधीचि, कर्ण आदि पौराणिक पात्रों के विषय में जानकारी प्राप्त कीजिए।


‘परोपकार’ विषय पर आधारित दो कविताओं और दो दोहों का संकलन कीजिए। उन्हें कक्षा में सुनाइए।


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कवि मैथिलीशरण गुप्त जी ने कहा, ‘अतर्क एक पंथ के सतर्क पंथ हों सभी।’ इस पंक्ति की सार्थकता व वर्तमान समय में इसका औचित्य स्थापित कीजिए।


निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सही विकल्प का चयन कीजिए-

चलो अमीष्ट मार्ग में सहर्ष खेलते हुए,
विपत्ति, विघ्न जो पढ़ें उन्हें ढकेलते हुए।
घटे न हेलमेल हाँ, बढ़े न भिन्‍नता कभी,
अतर्क एक पंथ के सतर्क पंथ हों सभी।
तभी समर्थ भाव है कि तारता हुआ तरे,
वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे

  1. कवि सभी को एक होकर चलने की प्रेरणा देते हैं। इससे ज्ञात होता है कि कवि ______ के पक्षघर हैं।
    (क) निरन्वय
    (ख) समन्वय
    (ग) क्रमान्वय
    (घ) दूरान्वय

  2. अभीष्ट मार्ग से तात्पर्य है-
    (क) स्वर्गगत मार्ग
    (ख) प्रमाणित मार्ग
    (ग) क्रीड़ाक्षेत्रीय मार्ग
    (घ) मनोवांछित मार्ग

  3. समर्थ भाव है, दूसरों को
    (क) सफल करते हुए स्वयं सफल होना
    (ख) ज्ञान मार्ग बताते हुए सफल बनाना
    (ग) शक्ति प्रदर्शन द्वारा सफलता दिलाना
    (घ) सफल करते हुए अपना स्वार्थ सिद्ध करना

  4. 'भिन्‍नता ना बढ़े' का आशय है-
    (क) मत भिन्नता हो
    (ख) मतभेद कम हों
    (ग) भेदभाव भिन्न हों
    (घ) मतभेद अधिक हों

  5. निम्नलिखित वाक्यों को ध्यानपूर्वक पढ़िए-
  1. हमें मृत्यु से कभी नहीं डरना चाहिए ।
  2. बाहय आडंबरों का विरोध करना चाहिए।
  3. मार्ग की विपत्तियों को ढकेलते हुए आगे बढ़ना चाहिए।
  4. प्राकृतिक सौंदर्य के लिए ईश्वर को धन्यवाद देना चाहिए।
  5. हमें अपने जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

    पदयांश से मेल खाते वाक्यों के लिए उचित विकल्प चुनिए -

    (क) (i), (ii), (v)
    (ख) (i), (iii), (v)
    (ग)  (ii), (iii), (iv)
    (घ)  (ii), (iv), (v)

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए और उपयुक्त कथन चुनिए।


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए:

'मनुष्यता' कविता में कवि ने कैसे जीवन को व्यर्थ बताया है, और क्यों?


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए:

'मानव जीवन का सबसे बड़ा भय मृत्यु ही है, फिर भी 'मनुष्यता' कविता में कवि ने मृत्यु से भयभीत न होने की बात क्यों कही है?


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