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Question
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए -
'मनुष्यता' कविता में भाग्यहीन किसे और क्यों कहा गया है? अपने शब्दों में लिखिए।
Solution
'मनुष्यता' कविता में मैथिलीशरण गुप्त ने भाग्यहीन व्यक्ति को उसे माना है जो धैर्यवान नहीं है। यानी वह व्यक्ति जिसमें धीरज धारण करने की क्षमता नहीं है, भाग्यहीन है। वह व्यक्ति बिल्कुल भाग्यहीन है, जो धैर्य धारण की क्षमता नहीं रखता। जिसके आचरण में सैदव अधीरता रहती है, वह व्यक्ति भाग्यहीन है। सच्चा मनुष्य वही है जो किसी मनुष्य के काम आए।
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निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के लिए सही विकल्प चुनकर लिखिए:
विचार लो कि मर्त्य हो न मृत्यु से डरो कभी, मरो, परंतु यों मरो कि याद जो करें सभी। हुई न यों सुमृत्यु तो वृथा मरे, वृथा जिए, मरा नहीं वही कि जो जिया न आपके लिए। वहीं पशु प्रवत्ति है कि आप आप ही चरे, वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे।। |
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- मृत्यु तो अवश्यंभावी है
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- दूसरों के लिए जीना - खाना
- परोपकार का भाव रखना
- दूसरों की भावनाओं को ठेस पहुँचाना
- कौन/सा से वाक्य पद्यांश से मेल खाता है/खाते हैं? [1]
- उदार मनुष्य दूसरों के लिए जीता - मरता है।
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- मनुष्य जीवन की सार्थकता पररोपकार में है।
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विकल्प:- केवल I
- II, IV
- I, III
- II, III