मराठी

'पैसा कमाने की लिप्सा ने आध्यामत्मिकता को भी एक व्यापार बना दिया है।' इस विषय पर कक्षा में परिचर्चा कीजिए। - Hindi (Elective)

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

'पैसा कमाने की लिप्सा ने आध्यामत्मिकता को भी एक व्यापार बना दिया है।' इस विषय पर कक्षा में परिचर्चा कीजिए।

थोडक्यात उत्तर

उत्तर

आज के समय में आध्यात्मिकता पैसे कमाने का सरल मार्ग बन गया है। इसे अब तो व्यापार के रूप में लिया जाता है। लोगों के जीवन में व्याप्त अशांति को आधार बनाकर उन्हें लुटा जा रहा है। इसे ही आध्यात्मिक भ्रष्टाचार कहते हैं। आध्यात्मिक भ्रष्टाचार इन दिनों समाज में बढ़ता जा रहा है। भगवान के नाम पर धर्मगुरूओं द्वारा आम जनता की भावनाओं के साथ खेला जा रहा है। आज की भागदौड़ वाले जीवन में मनुष्य के मन में शान्ति नहीं है। वह शान्ति की तलाश में धर्म गुरूओं का सहारा लेता है। यदि कुछ को छोड़ दिया जाए, तो अधिकतर धर्म गुरूओं का धर्म से कोई लेना-देना नहीं है। वह जनता को केवल उनका धन लुटने के लिए प्रयोग कर रहे हैं। हर कोई धर्मगुरू बन जाता है। समाज के आगे जब इनका झूठ खुलता है, तो जनता स्वयं को ठगा-सा महसूस करती है। गुरू ईश्वर प्राप्ति का मार्ग होता है परन्तु जब गुरू ही भटका हुआ हो, तो जनता को भटकाव और धोखे के अलावा कुछ प्राप्त नहीं हो सकता है। यही आध्यात्मिक भ्रष्टाचार कहलाता है।
shaalaa.com
टॉर्च बेचनेवाले
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 1.3: टार्च बेचनेवाले - प्रश्न-अभ्यास [पृष्ठ ४२]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi - Antar Class 11
पाठ 1.3 टार्च बेचनेवाले
प्रश्न-अभ्यास | Q 1. | पृष्ठ ४२

संबंधित प्रश्‍न

लेखक ने टार्च बेचनेवाली कंपनी का नाम 'सूरज छाप' ही क्यों रखा?


पाँच साल बाद दोनों दोस्तों की मुलाकात किन परिस्थितियों में और कहाँ होती है?


पहला दोस्त मंच पर किस रूप में था और वह किस अँधेरे को दूर करने के लिए टार्च बेच रहा था?


भव्य पुरुष ने कहा - 'जहाँ अंधकार है वहीं प्रकाश है।' इसका क्या तात्पर्य है?


भीतर के अँधेरे की टार्च बेचने और 'सूरज छाप' टार्च बेचने के धंधे में क्या फ़र्क है? पाठ के आधार पर बताइए।


'सवाल के पाँव ज़मीन में गहरे गड़े हैं। यह उखड़ेगा नहीं।' इस कथन में मनुष्य की किस प्रवृत्ति की ओर संकेत है और क्यों?


'व्यंग्य विधा में भाषा सबसे धारदार है।' परसाई जी की इस रचना को आधार बनाकर इस कथन के पक्ष में अपने विचार प्रकट कीजिए।


आशय स्पष्ट कीजिए -

क्या पैसा कमाने के लिए मनुष्य कुछ भी कर सकता है?


आशय स्पष्ट कीजिए -

प्रकाश बाहर नहीं है, उसे अंतर में खोजो। अंतर में बुझी उस ज्योति को जगाओ।


आशय स्पष्ट कीजिए -

धंधा वही करूँगा, यानी टार्च बेचूँगा। बस कंपनी बदल रहा हूँ।


लेखक ने ‘सूरज छाप’ टॉर्च को नदी में क्यों फेंक दिया? क्या आप भी वही करते? 


टॉर्च बेचने वाले किस प्रकार की स्किल प्रयोग करते हैं? इसका 'स्किल इंडिया’ प्रोग्राम से कोई संबंध है?


समाज में फैले अंधविश्वासों का उल्लेख करते हुए एक लेख लिखिए।


एन.सी.ई.आर.टी. द्वारा हरिशंकर परसाई पर बनाई गई फ़िल्म देखिए।


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×