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प्रश्न
प्रश्न 4.16 में वर्णित हेल्महोल्ट्ज कुंडलियों का उपयोग करके किसी लघुक्षेत्र में 0.75 T का एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र स्थापित किया है। इसी क्षेत्र में कोई एकसमान स्थिरविद्युत क्षेत्र कुंडलियों के उभयनिष्ठ अक्ष के लम्बवत लगाया जाता है। (एक ही प्रकार के) आवेशित कणों का 15 kV विभवान्तर पर त्वरित एक संकीर्ण किरण पुंज इस क्षेत्र में दोनों कुण्डलियों के अक्ष तथा स्थिरविद्युत क्षेत्र की लम्बवत दिशा के अनुदिश प्रवेश करता है। यदि यह किरण पुंज 9.0 x 10-5 Vm-1, स्थिरविद्युत क्षेत्र में अविक्षेपित रहता है तो यह अनुमान लगाइए कि किरण पुंज में कौन-से कण हैं। यह स्पष्ट कीजिए कि यह उत्तर
एकमात्र उत्तर क्यों नहीं है?
उत्तर
दिया है: B = 0.75 T, E = 9.0 × 10-5 V/m, V = 15 × 103 V
माना कण का द्रव्यमान m, वेग v तथा आवेश q है तब कण की
गतिज ऊर्जा qV = `1/2 "mv"^2`
`=> "v" = sqrt((2 "qV")/"m")`
विद्युत क्षेत्र के कारण कण पर बल Fe = qE
तथा कण पर चुम्बकीय बल Fm = qvB sin 90° = qvB
∵ दोनों क्षेत्रों से कण अविचलित गुजरता है; अतः कण पर कार्यरत दोनों बल परिमाण में बराबर व दिशा में विपरीत होंगे।
`therefore "qvB" = "qE" => "v" = "E"/"B"` या `sqrt("2qV"/"m") = "E"/"B"`
`therefore = "q"/"m" = "E"^2/(2"VB"^2) = ((9.0 xx 10^-5)^2)/(2 xx 15 xx 10^3 xx (0.75)^2) = 4.8 xx 10^7`C/kg
हम जानते है की प्रोटॉन के लिए `"q"/"m"` का मान `9.6 xx 10^7`C/kg होता है जबकि दिए गए कणों के लिए `"q"/"m"` के मान का आधा है। इससे ज्ञात होता है की इस कण का द्रव्यमान प्रोटॉन के द्रव्यमान का दोगुना होना चाहिए। अतः किरण पुंज में ड्यूटीरियम के आयन उपस्थित हो सकते है।
परन्तु ड्यूटीरियम ही एकमात्र ऐसा कण नहीं है जिसके लिए `"q"/"m"` का मान `4.8 xx 10^7`C/kg है।
द्विआयनित हीलियम परमाणु (`alpha` - कण या हीलियम नाभिक He++) के लिए `(2"e")/(2"m")` तथा त्रीआयनित लिथियम परमाणु (Li+++) के लिए `(3"e")/(3"m")` के लिए भी `"q"/"m"` का मान यही रहता है।
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