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प्रश्न
निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
विजय केवल लोहे की नहीं, धर्म की रही धरा पर धूम यवन को दिया दया का दान, चीन को मिली धर्म की दृष्टि किसी का हमने छीना नहीं, प्रकृति का रहा पालना यहीं चरित थे पूत, भुजा में शक्ति, नम्रता रही सदा संपन्न |
- कृति पूर्ण कीजिए: [2]
- उत्तर लिखिए:
- पद्यांश से लय-ताल युक्त शब्द ढूँढ़कर लिखिए: [1]
- ............. .............
- ............. .............
- निम्नलिखित प्रत्यययुक्त शब्दों के मूलशब्द पद्यांश से ढूँढ़कर लिखिए: [1]
- दयालु -
- प्राकृतिक -
- पद्यांश से लय-ताल युक्त शब्द ढूँढ़कर लिखिए: [1]
- उपर्युक्त पद्यांश की प्रथम चार पंक्तियों का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए। [2]
आकलन
उत्तर
-
- सके थके
- धूम धरा
- दयालु - दया
- प्राकृतिक - प्रकृति
- यह पद्यांश यह बताता है कि असली विजय केवल युद्ध और लोहा से नहीं प्राप्त होती, बल्कि धर्म की रक्षा से मिलती है। सम्राट ने भिक्षु बनकर दया दिखाई और घर-घर में धूम मचाई। उन्होंने 'यवन' को दया का उपहार दिया और चीन को धर्म की दृष्टि दी। इस प्रकार, धर्म और दया के माध्यम से उन्होंने समृद्धि और विजय प्राप्त की।
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या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?