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प्रश्न
वर्नर की अभिधारणाओं के आधार पर उपसहसंयोजन यौगिकों में आबंधन को समझाइए।
स्पष्ट करा
उत्तर
मुख्य अभिधारणाओं इस प्रकार हैं:
- उपसहसंयोजन यौगिकों में धातुएँ दो प्रकार की संयोजकताएँ दर्शाती हैं- प्राथमिक तथा द्वितीयक।
- प्राथमिक संयोजकताएँ सामान्य रूप से धातु परमाणु की ऑक्सीकरण अवस्था से संबंधित होती हैं तथा आयननीय होती हैं। ये संयोजकताएँ ऋणात्मक आयनों द्वारा संतुष्ट होती हैं।
- द्वितीयक संयोजकताएँ धातु परमाणु की उपसहसंयोजन संख्या से संबंधित होती हैं। द्वितीयक संयोजकताएँ अन-आयननीय होती हैं। ये उदासीन अणुओं अथवा ऋणात्मक आयनों द्वारा संतुष्ट होती हैं। द्वितीयक संयोजकता उपसहसंयोजन संख्या के बराबर होती है तथा इसका मान किसी धातु के लिए सामान्यत: निश्चित होता है।
- धातु से द्वितीयक संयोजकता से आबंधित आयन समूह विभिन्न उपसहसंयोजन संख्या के अनुरूप दिक्स्थान में विशिष्ट रूप से व्यवस्थित रहते हैं।
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उपसहसंयोजन यौगिकों का वर्नर का सिद्धांत
या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
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