Advertisements
Advertisements
Question
आयन-इलेक्ट्रॉन विधि द्वारा निम्नलिखित रेडॉक्स अभिक्रिया को संतुलित कीजिए-
\[\ce{MnO^-_4(aq) +SO2(g) -> Mn^2+(aq) + HSO^-_4(aq)}\] (अम्लीय माध्यम)
Solution
पद 1: पहले हम ढाँचा समीकरण लिखते हैं-
\[\ce{MnO^-_4(aq) + SO2(g) -> Mn^2+(aq) + HSO^-_4(aq)}\]
पद 2: दो अर्द्ध-अभिक्रियाएँ इस प्रकार हैं-
(i) ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया: \[\ce{S\overset{+4}{O2}(g) -> HS\overset{+6}{O^-_4}(aq)}\]
(ii) अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया: \[\ce{M\overset{+7}{n}O^-_4 -> \overset{+2}{Mn^2+(aq)}}\]
पद 3: ऑक्सीजन परमाणु के संतुलन के लिए हम ऑक्सीकरण अभिक्रिया में बाईं ओर 2 जल अणु जोड़ते हैं-
\[\ce{SO2(g) + 2H2O(l) -> HSO^-_4(aq)}\]
हाइड्रोजन परमाणु के संतुलन के लिए हम ऑक्सीकरण अभिक्रिया में दाईं ओर 3H+ आयन अणु जोड़ देते हैं-
\[\ce{SO2(g) + 2H2O(l) -> HSO^-_4(aq) + 3H^+(aq)}\]
पद 4: ऑक्सीकरण परमाणु के संतुलन के लिए हम अपचयन अभिक्रिया में दाईं ओर चार जल-अणु अणु जोड़ देते हैं-
\[\ce{MnO^-_4(aq) -> Mn^2+(aq) + 4H2O(l)}\]
हाइड्रोजन परमाणु के संतुलन के लिए हम अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया में बाईं ओर 8H+ आयन जोड़ देते हैं-
\[\ce{MnO^-_4(aq) + 8H^+(aq) -> Mn^2+(aq) + 4H2O(l)}\]
पद 5: इस पद में हम दोनों अर्द्ध-अभिक्रियाओं में आवेश का संतुलन दर्शाई गई विधि द्वारा करते हैं।
\[\ce{SO2(g) + 2H2O(l) -> HSO^-_4(aq) + 3H^+(aq) + 2e^-}\]
\[\ce{MnO^-_4(aq) + 8H^+(aq) + 5e^- -> Mn^2+(aq) + 4H2O(l)}\]
इलेक्ट्रॉनों की संख्या एकसमान बनाने के लिए ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया को 5 से तथा अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया को 2 से गुणा करते हैं-
\[\ce{5SO2(g) + 10H2O(l) -> 5HSO^-_4(aq) + 15H^+(aq) + 10e^-}\]
\[\ce{2MnO^-_4(aq) + 16H^+(aq) + 10e^- -> 2Mn^2+(aq) + 8H2O(l)}\]
पद 6: दोनों अर्द्ध-अभिक्रियाओं को जोड़ने पर-
\[\ce{2MnO^-_4(aq) + 5SO2(g) + 2H2O(l) + H^+(aq) -> 5HSO^-_4(aq) + 2Mn^2+(aq)}\]
अंतिम सत्यापन दर्शाता है की दोनों ओर के परमाणुओं की संख्या तथा आवेश की दॄष्टि से समीकरण संतुलित है।
APPEARS IN
RELATED QUESTIONS
निम्नलिखित यौगिक के सूत्र लिखिए-
मरक्यूरी (II) क्लोराइड
निम्नलिखित यौगिक के सूत्र लिखिए-
थेलियम (I) सल्फेट
निम्नलिखित यौगिक के सूत्र लिखिए-
क्रोमियम (III) ऑक्साइड
उन पदार्थों की सूची तैयार कीजिए, जिनमें कार्बन -4 से +4 तक की तथा नाइट्रोजन -3 से +5 तक की ऑक्सीकरण अवस्था होती है।
अपनी अभिक्रियाओं में सल्फर डाइऑक्साइड तथा हाइड्रोजन परॉक्साइड ऑक्सीकारक तथा अपचायक दोनों ही रूपों में क्रिया करते हैं, जबकि ओजोन तथा नाइट्रिक अम्ल केवल ऑक्सीकारक के रूप में ही। क्यों?
इन अभिक्रिया को देखिए -
\[\ce{6CO2(g) + 6H2O(l) -> C6H12O6(aq) + 6O2(g)}\]
बताइए कि इन्हें निम्नलिखित ढंग से लिखना ज्यादा उचित क्यों है?
\[\ce{6CO2(g) + 12H2O(l) -> C6H12O6(aq) + 6H2O(l) + 6O2(g)}\]
उपर्युक्त अपचयोपचय अभिक्रिया के अन्वेषण की विधि सुझाइए।
इस अभिक्रिया को देखिए-
\[\ce{O3(g) + H2O2(l) -> H2O(l) + 2O2(g)}\]
बताइए कि इसे निम्नलिखित ढंग से लिखना ज्यादा उचित क्यों है?
\[\ce{O3(g) + H2O2(l) -> H2O(l) + O2(g) + O2(g)}\]
उपर्युक्त अपचयोपचय अभिक्रिया के अन्वेषण की विधि सुझाइए।
"जब भी एक ऑक्सीकारक तथा अपचायक के बीच अभिक्रिया संपन्न की जाती है, तब अपचायक के आधिक्य में निम्नतर ऑक्सीकरण अवस्था का यौगिक तथा ऑक्सीकारक के आधिक्य में उच्चतर ऑक्सीकरण अवस्था का यौगिक बनता है।" इस वक्तव्य का औचित्य तीन उदाहरण देकर दीजिए।
इस प्रेक्षण की अनुकूलता को कैसे समझाएँगे?
क्लोराइडयुक्त अकार्बनिक यौगिक में सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल डालने पर हमें तीक्ष्ण गंध वाली HCI गैस प्राप्त होती है, परंतु यदि मिश्रण में ब्रोमाइड उपस्थित हो, तो हमें ब्रोमीन की लाल वाष्प प्राप्त होती है, क्यों?
आयन-इलेक्ट्रॉन विधि द्वारा निम्नलिखित रेडॉक्स अभिक्रियाओं को संतुलित कीजिए-
\[\ce{MnO^-_4(aq) + I^-(aq) -> MnO2(s) + I2(s)}\] (क्षारीय माध्यम)