Advertisements
Advertisements
Question
भाव स्पष्ट कीजिए -
हिति चित्त की द्वै थूँनी गिराँनी, मोह बलिंडा तूटा।
Solution
ज्ञान की आँधी ने स्वार्थ तथा मोह दोनों स्तम्भों को गिरा कर समाप्त कर दिया तथा मोह रुपी छत को उड़ाकर चित्त को निर्मल कर दिया।
APPEARS IN
RELATED QUESTIONS
'रस्सी' यहाँ किसके लिए प्रयुक्त हुआ है और वह कैसी है?
आप जहाँ रहते हैं उस इलाके के किसी मौसम विशेष के सौंदर्य को कविता या गद्य में वर्णित कीजिए।
अलसी के मनोभावों का वर्णन कीजिए।
कवि ने प्रकृति का मानवीकरण कहाँ-कहाँ किया है?
बीते के बराबर, ठिगना, मुरैठा आदि सामान्य बोलचाल के शब्द हैं, लेकिन कविता में इन्हीं से सौंदर्य उभरा है और कविता सहज बन पड़ी है। कविता में आए ऐसे ही अन्य शब्दों की सूची बनाइए।
कविता को पढ़ते समय कुछ मुहावरे मानस-पटल पर उभर आते हैं, उन्हें लिखिए और अपने वाक्यों में प्रयुक्त कीजिए।
पत्थर कहाँ पड़े हुए हैं? वे क्या कर रहे हैं? ‘चंद्र गहना से लौटती बेर’ कविता के आधार पर लिखिए?
मेघों के लिए 'बन-ठन के, सँवर के' आने की बात क्यों कही गई है?
कवि ने पीपल को ही बड़ा बुज़र्ग क्यों कहा है? पता लगाइए।
कवि को माँ की याद कब आई और क्यों?