Advertisements
Advertisements
Question
गलनांक तथा क्वथनांक पर किसी पदार्थ का ताप स्थिर क्यों रहता है?
Solution
ठोस के गलनांक पर पहुँचने के बाद उसमें दिया जाने वाला ताप पूरे ठोस को पिघलने में उपयोग होता है। इस स्थिति में सिस्टम का ताप तबतक नहीं बढ़ता है, जबतक पूरा ठोस पिघल नहीं जाता है। इस क्रम में दिया जाने वाला उष्मा संगलन गुप्त उष्मा कहलाती है।
उसी प्रकार किसी द्रव क्वथनांक पर पहुँचने के बाद उसमें प्रवाहित की जाने वाली उष्मा का उपयोग पूरे द्रव को गैस (जैसे जल को वाष्प) में बदलने में खर्च होता है, तथा सिस्टम को लगातार तापीय उर्जा देने के बाद भी उसका तापमान नहीं बढ़ता है। इस क्रम में बिना तापमान बढ़े ही खर्च होने वाली उष्मा वाष्पीकरण की गुप्त उष्मा कहलाती है।
अत: गलनांक तथा क्वथनांक पर पदार्थ का ताप स्थिर रहता है।
APPEARS IN
RELATED QUESTIONS
किसी भी पदार्थ की अवस्था परिवर्तन के दौरान तापमान स्थिर क्यों रहता है?
वायुमंडलीय गैसों को द्रव में परिवर्तित करने के लिए कोई विधि सुझाइए।
रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए -
कक्ष ताप पर एक द्रव के वाष्पन से ______ प्रभाव होता है।
निम्नलिखित कथन पर टिप्पणी कीजिए -
स्पंज यद्यपि संपीड्य है, फिर भी एक ठोस है।
ठोसों, द्रवों और गैसों में कणों की गतिशीलता दर्शाने के लिए एक प्रतिदर्श का निर्माण करें।
इसका निर्माण करने हेतु आपको इनकी आवश्यकता पड़ेगी
- एक पारदर्शी जार
- एक बड़ा रबर का गुब्बारा अथवा खींची गई रबर की एक शीट एक तार
- कुछ कुक्कुट को डाले जाने वाले दाने अथवा काले चने अथवा शुष्क हरे दाने।
प्रतिदर्श का निर्माण कैसे किया जाए?
- दानों को जार में डालें
- तार को रबर शीट के मध्य में पिरो दें और इसे सुरक्षा की दृष्टि से टेप के माध्यम से कस कर बाँधें।
- अब रबर शीट को खींचे और इसे जार के मुख पर बाँध दें।
- आपका प्रतिदर्श तैयार है। अब आप उँगली के माध्यम से तार को ऊपर नीचे धीरे से या तेज़ी से सरका सकते हैं।