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हम सदैव कहते हैं कि आभासी प्रतिबिंब को परदे पर केन्द्रित नहीं किया जा सकता। यद्यपि जब हम किसी आभासी प्रतिबिंब को देखते हैं तो हम इसे स्वाभाविक रूप में अपनी आँख की स्क्रीन - Physics (भौतिक विज्ञान)

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Question

हम सदैव कहते हैं कि आभासी प्रतिबिंब को परदे पर केन्द्रित नहीं किया जा सकता। यद्यपि जब हम किसी आभासी प्रतिबिंब को देखते हैं तो हम इसे स्वाभाविक रूप में अपनी आँख की स्क्रीन (अर्थात् रेटिना) पर लेते हैं। क्या इसमें कोई विरोधाभास है?

Short Note

Solution

जब किसी दर्पण से परावर्तन अथवा लेन्स से अपवर्तन के पश्चात् किरणें अपसरित होती हैं तो प्रतिबिंब को आभासी कहा जाता है। इस प्रतिबिंब को परदे पर प्राप्त नहीं किया जा सकता। यदि इन अपसारी किरणों के मार्ग में कोई अन्य दर्पण अथवा लेन्स रखकर इन्हें किसी बिन्दु पर अभिसरित किया जा सकता तो वहाँ वास्तविक प्रतिबिंब बनेगा जिसे परदे पर प्राप्त किया जा सकता है। नेत्र लेन्स वास्तव में यही कार्य करता है। यह आभासी प्रतिबिंब बनाने वाली अपसारी किरणों को रेटिना पर अभिसरित कर देता है, जहाँ वास्तविक प्रतिबिंब बन जाता है। अतः इसमें कोई विरोधाभास नहीं है।

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गोलीय दर्पणों द्वारा प्रकाश का परावर्तन
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Chapter 9: किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र - अभ्यास [Page 349]

APPEARS IN

NCERT Physics [Hindi] Class 12
Chapter 9 किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र
अभ्यास | Q 9.18 - (b) | Page 349

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  1. दूरबीन का समायोजन सामान्य है (अर्थात अंतिम प्रतिबिंब अनंत पर बनता है)।
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  1. दूरबीन का समायोजन सामान्य है (अर्थात अंतिम प्रतिबिंब अनंत पर बनता है)। अभिदृश्यक लेंस तथा नेत्रिका के बीच पृथक्कन दूरी क्या है?
  2. यदि इस दूरबीन का उपयोग 3 km दूर स्थित 100 m ऊँची मीनार को देखने के लिए किया जाता है तो अभिदृश्यक द्वारा बने मीनार के प्रतिबिंब की ऊँचाई क्या है?
  3. यदि अंतिम प्रतिबिंब 25 cm दूर बनता है तो अंतिम प्रतिबिंब में मीनार की ऊँचाई क्या है?

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