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जीवन की जद्दोजहद न चार्ली के व्यक्तित्व को कैसे संपन्न बनाया? - Hindi (Core)

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Question

जीवन की जद्दोजहद न चार्ली के व्यक्तित्व को कैसे संपन्न बनाया?

Answer in Brief

Solution

चार्ली का जीवन बचपन से ही विषमताओं और कष्टों से भरा हुआ था। उनके पिता ने उन्हें बहुत ही छोटी उम्र में छोड़ दिया था। माँ मानसिक रोगी थीं। उनके पागलपन ने उन्हें अचानक ही कष्टों के मध्य ला खड़ा किया। एक तरफ़ गरीबी तथा दूसरी तरफ़ पागल माँ। शीघ्र ही उन्हें उस समय व्याप्त पूंजीपति वर्ग द्वारा किए गए शोषण का भी शिकार होना पड़ा। उनकी नानी खानाबदोश थी और पिता यहूदी थे। इन विशेषताओं के कारण वह घुमंतू स्वभाव के बने थे और जीवन को नजदकी से देखा। जीवन में जटिलता बचपन से ही थी, जो आगे चलकर बढ़ती चली गई। लेकिन इनसे चार्ली पर बुरा असर नहीं पड़ा और उनका व्यक्तित्व ऐसे ही निखरता गया जैसे सोना घिसकर चमक जाता है। कष्टों ने उन्हें जीवन की बहुत अच्छी समझ दी। इसका यह प्रभाव पड़ा कि उनमें जीवन मूल्य कूट-कूटकर विद्यमान हो गए। आगे चलकर इन्हीं जीवन मूल्यों ने उनके व्यक्तित्व को संपन्न बनाया।
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चार्ली चैप्लिन यानी हम सब
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Chapter 15: विष्णु खरे (चार्ली चैप्लिन यानी हम सब) - अभ्यास [Page 125]

APPEARS IN

NCERT Hindi - Aaroh Class 12
Chapter 15 विष्णु खरे (चार्ली चैप्लिन यानी हम सब)
अभ्यास | Q 5. | Page 125

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