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काव्य सौंदर्य स्पष्ट कीजिए- हस्ती चढ़िए ज्ञान कौ, सहज दुलीचा डारि।स्वान रूप संसार है, भूँकन दे झख मारि। - Hindi Course - A

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Question

काव्य सौंदर्य स्पष्ट कीजिए-

हस्ती चढ़िए ज्ञान कौ, सहज दुलीचा डारि।
स्वान रूप संसार है, भूँकन दे झख मारि।

Short Answer

Solution

इस दोहे में ज्ञान को हाथी और संसार को कुत्ते से जोड़कर ज्ञान के महत्व को बताया गया है। कबीर कहते हैं कि मनुष्य को ज्ञान रूपी हाथी की सवारी सहजता से करनी चाहिए, जैसे कालीन बिछाकर उसे आराम से चलाना। यदि संसार रूपी कुत्ता उसकी निंदा करता है, तो उसकी परवाह नहीं करनी चाहिए। यहाँ रूपक अलंकार का प्रयोग किया गया है। यह दोहा छंद में है और इसमें ‘हस्ती’, ‘स्वान’, ‘ज्ञान’ जैसे तत्सम शब्दों का प्रयोग हुआ है। दोहे की भाषा सधुक्कड़ी है और यहाँ सहज ज्ञान को महत्व दिया गया है।
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पद्य (Poetry) (Class 9 A)
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Chapter 9: साखियाँ एवं सबद - प्रश्न अभ्यास [Page 93]

APPEARS IN

NCERT Hindi - Kshitij Part 1 Class 9
Chapter 9 साखियाँ एवं सबद
प्रश्न अभ्यास | Q 7 | Page 93

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