English

क्या आप एक छोटे समूह में समानता के लिए एक समाजिक विज्ञापन तैयार क्र सकते हो? - Social Science (सामाजिक विज्ञान)

Advertisements
Advertisements

Question

क्या आप एक छोटे समूह में समानता के लिए एक समाजिक विज्ञापन तैयार क्र सकते हो?

Answer in Brief

Solution

समानता तब आती है जब सभी के साथ समान व्यवहार किया जाता है। यह कई अन्य लोगों के बीच सामाजिक वर्ग, जातीय समूह, धर्म, जाति, लिंग और पेशे की परवाह किए बिना है। प्रत्येक व्यक्ति को बिना पक्षपात के एक जैसा व्यवहार दिया जाता है। यह समान व्यवहार संसाधनों के आवंटन, शिक्षा प्रदान करने, सरकार द्वारा सेवाएं देने, और खेल के स्थानों, और सामाजिक संपर्क के स्थानों जैसे सभी स्थानों को साझा करने के रूप में है। यह दूसरों को यह महसूस कराए बिना किया जाता है कि वे बेकार हैं या वे उत्पीड़ित हैं।

shaalaa.com
भारत का संविधान-एक जीता हुआ दस्तावेज़
  Is there an error in this question or solution?
Chapter 9: समानता के लिए संघर्ष - अभ्यास [Page 109]

APPEARS IN

NCERT Social Science - Social and Political Life 2 [Hindi] Class 7
Chapter 9 समानता के लिए संघर्ष
अभ्यास | Q 11. | Page 109

RELATED QUESTIONS

जाने का हक

मेरे सपनों को ये जानने का हक रे। .....

क्यूँ सदियों से टूट रहे हैं, इन्हें सजने का नाम नहीं

मेरे हाथों को ये जानने का हक रे......

क्यूँ बरसों से खाली पड़े हैं, इन्हें आज़ भी काम नहीं

मेरे पैरों को ये जानने का हक रे.......

क्यूँ गाँव-गाँव चलना पड़े है, क्यूँ बीएस का निशान नहीं

मेरी भूख को ये जानने का हक रे.......

क्यूँ गोदामों में सड़ते हैं दाने, मुझे मुट्ठी- भर धान अन्य नहीं

मेरी बूढ़ी माँ को ये जानने का हक रे.......

क्यूँ गोली नहीं सुई, दवाखाने, पट्टी-टाँके का सामान नहीं

मेरे बच्चों को ये जानने का हक रे.......

क्यूँ रात-दिन करें मज़दूरी, क्यूँ शाला मेरे गाँव में नहीं

उपर्युक्त गीत में से आपको कौन-सी पँक्ति प्रिय लगी?


जाने का हक

मेरे सपनों को ये जानने का हक रे। .....

क्यूँ सदियों से टूट रहे हैं, इन्हें सजने का नाम नहीं

मेरे हाथों को ये जानने का हक रे......

क्यूँ बरसों से खाली पड़े हैं, इन्हें आज़ भी काम नहीं

मेरे पैरों को ये जानने का हक रे.......

क्यूँ गाँव-गाँव चलना पड़े है, क्यूँ बीएस का निशान नहीं

मेरी भूख को ये जानने का हक रे.......

क्यूँ गोदामों में सड़ते हैं दाने, मुझे मुट्ठी- भर धान अन्य नहीं

मेरी बूढ़ी माँ को ये जानने का हक रे.......

क्यूँ गोली नहीं सुई, दवाखाने, पट्टी-टाँके का सामान नहीं

मेरे बच्चों को ये जानने का हक रे.......

क्यूँ रात-दिन करें मज़दूरी, क्यूँ शाला मेरे गाँव में नहीं

'मेरी भूख को ये जानने का हक रे' इस पँक्ति से कवि का आशय क्या हो सकता है?


क्या आप अपनी भाषा में अपने क्षेत्र में प्रचलित कोई ऐसा गीत या कविता कक्षा में सुना सकते हैं, जिसमें मनुष्य की समता और गरिम का वर्णन मिलता हो?


समानता के लिए लोगों के संघर्ष में हमारे संविधान की क्या भूमिका हो सकती है? 


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×